तूफान के अलर्ट ने हर किसी को डरा दिया है। सोशल मीडिया, खबरों और लोगों की चर्चा में सिर्फ तूफान है। कासगंज और एटा में इसका असर साफ देखा जा रहा है। बादल छाते ही लोग घरों की ओर दौड़ने लगते हैं।
पिछले दिनों आगरा में आए तूफान ने तबाही मचाई थी। लगातार दो बार आए तूफान से अब तक आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा में कई लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है।
जिले में सोमवार को एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलता देख लोग परेशान हो गए। अलर्ट को देखते हुए लोग पूरे दिन टीवी पर नजरें टिकाए रहे। बाजारों में भी लोग कम नजर आए।
क्या करें, क्या न करें
तूफान से घबराने की जरूरत नहीं है। उससे बचने के लिए सतर्क और सजग रहे। तूफान से पहले अपने आसपास कमजोर पेड़ों की डालियों की छंटनी कर दें। यदि मकान कमजोर है, तो मरम्मत करा लें।
तूफान के दौरान वाहन न चलाएं। अगर आप वाहन से कहीं जा रहे हैं, रास्ते में तूफान आया तो वाहन को खड़ा कर सुरक्षित पर mचले जाएं। पेड़, बिजली पोल, होर्डिंग्स के पास खड़े न हों।
बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। बिजली कड़कने पर मजबूत पक्के मकान में शरण लें। कमजोर टिन शेड आदि को मजबूती से बांध दे। बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल दें। कोई हादसा होने पर 100 नंबर पर पुलिस को खबर दें।
कासगंज में पर्याप्त नहीं व्यवस्थाएं
कासगंज जिले में तो तूफान से निपटने की व्यवस्था ही नहीं है। जिला अस्पताल में चिकित्सक और दवाएं कम हैं तो बिजली विभाग के पास तार और पोल टूटने पर इन्हें दुरुस्त करने की व्यवस्था नहीं है।
जिले में बने स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 93 चिकित्सकों के पदों में 28 ही तैनात हैं। इनमें से करीब आधा दर्जन चिकित्सक डिप्टी सीएमओ, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी सहित अन्य पदों को संभालते हैं।
आंधी व तूफान आने पर बिजली के पोल टूटने की संभावना रहती है, लेकिन विद्युत विभाग के पास न तो पर्याप्त तार हैं न ही पोल। ट्रांसफार्मर का स्टॉक भी नहीं है। दमकल विभाग भी संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।