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सावधान! खामोशी से पांव पसार रही है हेपेटाइटिस, रक्तदान के बाद जांच में हुआ खुलासा

Wed, 21 Aug 2019 11:08 AM IST
Abhishek Saxena धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा
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बीमारी
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घातक बीमारी हेपेटाइटिस बी खामोशी से लोगों को शिकार बना रही है। इसके संकेत रक्तदान में संग्रहीत रक्त के नमूनों की जांच रिपोर्ट से मिले हैं। रक्तदाता बेखबर हैं लेकिन सौ में से 15 लोगों को यह बीमारी है।
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संख्या कम सही लेकिन 3.5 फीसदी लोग हेपेटाइटिस सी, 0.9 फीसदी वीडीआरएल और 0.5 फीसदी एड्स (एचआईवी पाजिटिव) की चपेट में पाए गए। ये सभी बीमारियां घातक हैं और एक सीमा के बाद जानलेवा हो जाती हैं। 

यह जानकारी एसएन मेडिकल कॉलेज और एक निजी ब्लड बैंक को चालू वित्त वर्ष में अब तक हुए रक्तदान से आए रक्त की कुल यूनिटों की जांच से सामने आई है। जिले में दो सरकारी समेत 18 ब्लड बैंक हैं। साल में 55 से 60 हजार यूनिट रक्त की हर साल जरूरत पड़ती है।
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रक्तदाता से सामान्य जानकारी पूछकर रक्तदान कराया जाता है। बाद में लेकिन रक्त की लैब में हेपेटाइटिस बी, सी, एचआईवी, सिफलिस और मलेरिया की जांच अनिवार्य रूप से की जाती है।

रक्तदाता में इन बीमारियों की पुष्टि होने पर यह रक्त मरीजों को चढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाती और इसे नियमानुसार नष्ट कर दिया जाता है। फिर ब्लड बैंक की ओर से रक्तदाता को बीमारी की जानकारी दी जाती है ताकि वह उनका इलाज शुरू कर सके।

हेपेटाइटिस के लक्षण 
हेपेटाइटिस बी: यह वायरस के कारण होता है, जो लिवर को संक्रमित करता है। इसमें आंखें पीली होना, पेट दर्द, पेशाब का रंग गहरा हो जाता है। समय से इलाज न हो तो लिवर काम करना बंद कर देता है।

हेपेटाइटिस सी: लिवर में सूजन आ जाती है। यह दूषित रक्त चढ़ने, संक्रमित सुई लगने, टैटू के संक्रमित उपकरण से भी हो सकता है। थकान, उल्टी आना, भूख में कमी और आंख-त्वचा पीली नजर आती है।
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रक्तदान बचाए खुद की भी जान   
डॉ. नीतू चौहान, प्रभारी, एसएन ब्लड बैंक ने बताया कि जांच के बाद जब रक्तदान करने वाले को हेपेटाइटिस बी-सी, एचआईवी और सिफिलस आदि के चपेट में होने की जानकारी दी जाती है तो वे सहसा विश्वास नहीं कर पाते। प्राय: सभी कहते हैं कि उन्हें इसका पता न था। नियमित रक्तदान या रक्त की जांच करानी चाहिए। इससे खुद का भी बचाव है।


हेपेटाइटिस का देर पता चलता है
डॉ. विवेक अग्रवाल, पेट रोग विशेषज्ञ का कहना है कि हेपेटाइटिस मर्ज बढ़ रहा है। ऐसे मरीजों की संख्या अधिक है, जो किसी अन्य बीमारी में रक्त की जांच कराने आए। चिकित्सक किसी भी ऑपरेशन से पहले मरीज के हेपेटाइटिस की जांच अनिवार्य रूप से कराते हैं। इसमें भी मरीज मिल रहे हैं, जिनको पहले से हेपेटाइटिस होने की जानकारी नहीं थी।
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