कासगंज गर्मी की खबर से संबंधित फोटो- धूप से बचाव के लिए मुंह ढककर निकलतीं युवतियां
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कासगंज। 12 साल बाद अप्रैल में पारा फिर से 46 डिग्री के आंकड़े को छू गया। सुबह से ही आसमान से आग बरसना शुरू हो गई। गर्म हवा के थपेड़े शूल से चुभते रहे, जिससे गर्मी से लोग अकुलाहट महसूस करने लगे। दोपहर में बाजारों की चहलपहल प्रभावित हो गई।
जिला में अप्रैल में वर्ष 2010 में भीषण गर्मी पड़ी थी। 26 अप्रैल को पारा 46 डिग्री के आंकड़े को छू गया था। यह स्थिति लगातार दो दिन बनी रही। इसके बाद वर्ष 2022 में अप्रैल का महीना सबसे गर्म है। इस महीने के आरंभ से ही काफी गर्मी पड़ रही है। 26 अप्रैल की रात को आई आंधी के बाद मौसम में सुबह के मौसम में कुछ राहत आ गई थी, लेकिन दोपहर में गर्मी नेेेेेेेेे फिर से अपनी दस्तक दे दी थी। बृहस्पतिवार को सुबह से ही आसमान से आग बरसने लगी। सुबह के समय न्यूनतम पारा 30 डिग्री तक पहुंच गया। दिन चढ़ने के साथ पारा भी चढ़ने लगा। दोपहर 11 बजे ही पारा 43 डिग्री के आंकड़े पर पहुंच गया। इतना अधिक पारा हो जाने से लोगों के लिए गर्मी असहयनीय होने लगी। दोपहर तीन बजे पारे ने 46 डिग्री के आंकड़े को छू लिया। इससे लोगों के लिए काफी दिक्कतें बढ़ गई। हवा की रफ्तार भी 20 किमी प्रतिघंटा हो गई। इससे गर्म हवा के थपेड़े लोगों के लिए परेशान करने लगे। दो घंटे तक पारा 46 डिग्री के आंकड़े पर बना रहा। ऐसे में गर्मी से परेशान लोगों का गली चटकने लगा। लोग धूप की तपिश से बचने के लिए छावं तलाशते रहे। बाजार में जिस साइड में छांव नजर आती उधर ही चलते लगते। सांय के समय जब पारा गिरना शुरू हुआ तब लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। इसके बाद ही बाजार की चहल पहल लौट सकी।
पशु-पक्षी भी नजर आए बेहाल
कासगंज। मौसम में गर्मी की अधिकता ने पशु पक्षियों को बेहाल कर दिया। सुबह के समय घौंसलों से निकले पक्षी गर्मी की अधिकता को देख जल्द ही लौट गए। वहीं बंदर, कुत्ता आदि जानवर भी गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए छांव तलाशते रहे। पार्क में पेड़ों की छांव के नीचे बंदरों के झुंड बैठे देखे गए।
वर्ष अधिकतम पारा न्यूनतम पार
2010 46 26
2011 42 26
2012 37 26
2013 40 29
2014 42 29
2015 40 28
2016 42 32
2017 41 30
2018 43 29
2019 43 31
2020 34 26
2021 43 31