मैनपुरी। जिला अस्पताल स्थित हृदय रोग विभाग में सालों से ताला लटका हुआ है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों के लिए रेफर स्लिप ही एकमात्र उपचार है। चार सालों से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के चलते हृदयघात से मरने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
बिगड़ती दिनचर्या और खानपान से हृदय संबंधी रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में चार साल से हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। आपातकालीन स्थिति में भी जिला अस्पताल में उपचार के बजाए हृदय रोगियों को केवल रेफर स्लिप ही दी जाती है। ऐसे में सैफई मेडिकल कॉलेज पहुंचने तक जिंदगी की जंग लड़ना मरीज के लिए आसान नहीं होता।
जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि हालात बिगड़ते जा रहे हैं। एक ओर जहां हृदयघात से प्रतिमाह मरने वालों का आंकड़ा जिले में अब लगभग 20 हो गया है। वहीं प्रतिदिन दस हृदय रोगी उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई बार स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए पत्र लिखा गया, लेकिन आज तक तैनाती नहीं हो सकी।
नौ महीने में 180 लोगों की हुई हार्ट अटैक से मौत
स्वास्थ्य विभाग में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार जिले में हर महीने हृदय घात से औसतन 20 मरीजों की मौत हो रही है। इस साल जनवरी से अब तक जिले में 180 लोगों की हार्टअटैक से मौत हो चुकी है। इन मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता था, अगर जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती होती।
उम्र बढ़ने के साथ बढ़ जाता है खतरा
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जेजे राम बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर के विभिन्न हिस्सों की रक्त वाहिकाओं में कोलस्टरॉल जम जाता है। इससे रक्त के बहाव में धीरे-धीरे बाधा आती है। इस प्रक्रिया को एथेरोसिलेरोसिस कहते हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हृदयघात होने की संभावना अधिक होती है। ऐसा महिलाओं में मौजूद हार्मोन के कारण होता है।
हृदयघात के लक्षण
- जकड़न के साथ सीने में दर्द
- सांस लेने में कठिनाई होना
- पसीना, चक्कर और बेहोशी आना
- सीने में आगे या हड्डी के पीछे दर्द होना
बचाव के उपाय
- नियमित शारीरिक व्यायाम करें
- धूम्रपान न करें
- संतुलित आहार लें
- दिल की बीमारी होने पर दवा का सेवन करें
हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए चार साल में 40 से अधिक पत्र लिखे जा चुके हैं। जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की जा सकी। एक बार फिर से विभाग को पत्र लिखकर जानकारी दी जा रही है। फिलहाल प्राथमिक उपचार के साथ मरीज को रेफर किया जा रहा है।
डॉ. आरके सागर, सीएमएस जिला अस्पताल