एटा में टीबी की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर टीबी मरीज खोज रही हैं। अब तक 184 छिपे हुए टीबी रोगी मिले हैं। इनका इलाज शुरू कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में टीबी मरीजों की खोज के लिए अभियान चलाया जा रहा है। यहां 10 दिन में स्वास्थ्यकर्मियों को 184 छिपे हुए टीबी के मरीज मिले हैं। यह मरीज अस्पताल नहीं पहुंच रहे थे। इन सभी मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया है।
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भारत सरकार का 2025 तक देश को क्षय रोग से मुक्त करने का लक्ष्य है। इसके लिए मरीजों की समय से पहचान एवं उपचार शुरू करके ही संक्रमण को रोका जा सकता है। 24 फरवरी से जिले में एसीएफ (एक्टिव केस फाइंडिंग) अभियान शुरू किया गया। अभियान पांच मार्च को समाप्त हो गया।
इसमें 160 टीमें लगाई गईं हैं। टीमों ने घर-घर जाकर क्षय रोग के लक्षण वाले व्यक्तियों को चिह्नित किया। इस दौरान 883 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। अभियान में 47 व्यक्तियों को बलगम से क्षय रोग की पुष्टि हुई। जबकि, 137 व्यक्तियों को एक्स-रे आदि से क्षय रोग की पुष्टि हुई।
ये हैं टीबी के लक्षण
दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी आना।
शाम को बुखार आना।
सीने में लगातार दर्द।
खांसते समय मुंह से खून आना।
भूख न लगना व लगातार वजन घटना।
खांसी के दौरान अधिक बलगम निकलना।
सीएमओ डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया 24 फरवरी से जिले में क्षय रोगियों को खोजने का अभियान शुरू किया गया। टीमों ने घर-घर जाकर मरीजों की पड़ताल की। इस दौरान 184 क्षय रोगी मिले। जिनका विभाग द्वारा उपचार शुरू कर दिया गया है।