बिछवां। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा की जान आफत में पड़ती नजर आई। अस्पताल से वापस करने के कारण प्रसव पीड़िता पुन: अस्पताल देरी से पहुंच सकी, जिससे अस्पताल पहुंचने से पहले एंबुलेंस में ही उसने बच्चे को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
शासन का निर्देश है कि प्रसव पीड़िताओं को संस्थागत प्रसव कराया जाए। यदि प्रसव पीड़िता को दो से तीन दिन प्रसव में बाकी हैं तो उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया जाए। क्षेत्र के गांव बलारपुर निवासी प्रीती को पिछले दो दिनों से प्रसव पीड़ा हो रही थी। रविवार को परिजन उसे लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुल्तानगंज गए थे।
यहां तैनात स्टाफ ने उसे यह कहते हुए वापस कर दिया कि अभी प्रसव में समय है, तीन दिन बाद लाना। सोमवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे प्रसव पीड़िता की हालत बिगडने लगी तो परिजनों ने 102 एंबुलेंस को कॉल किया। एंबुलेंस पहुंची, लेकिन प्रीती ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में बच्चे को जन्म दे दिया।
मामले की जानकारी नहीं है। यदि स्टाफ ने प्रसव पीड़िता को वापस किया है तो मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी स्टाफ के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
-डॉ. एके पांडेय, सीएमओ