आगरा में स्वास्थ्य विभाग की छापामार कार्रवाई से पहले सूचना लीक हो गई। ट्रांस यमुना कॉलोनी बी-ब्लाक स्थित केजी हॉस्पिटल में मंगलवार को टीम पहुंचने से पहले ही मरीज भगा दिए गए। टीम पहुंची तो यहां संचालक मिला, वो फोन पर डॉक्टरों को बुलाने की बात कहते हुए गच्चा दे गया।
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सी ब्लाक स्थित मधुवन हास्पिटल में डॉक्टर मिला, लेकिन यहां मरीज का इलाज किसने किया, इसमें डाक्टर और मरीज के विरोधाभास बयान थे। नोटिस देकर मरीज भर्ती पर रोक लगा दी है। एसीएम द्वितीय के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने केजी हॉस्पिटल में छापा मारा।
यहां एक भी मरीज नहीं मिला। 13 बेड थे। बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण लॉग बुक में 21 अगस्त तक की एंट्री थी। 25-30 मरीजों की फाइल मिली। इसमें से पांच मरीजों के हार्निया, प्रोस्टेट, बच्चेदानी के आपरेशन का जिक्र था। किस डॉक्टर ने किया, इस पर कोई उल्लेख नहीं था।
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अस्पताल पर छापा
- फोटो : अमर उजाला
यहां एक युवक मिला, उसने टीम को फोन कर डॉक्टर बुलाने की बात कही, इसी बीच वह भाग निकला। टीम ने निरीक्षण में देखा कि बोर्ड पर डॉ. सुरेश के. छाबड़ा और डॉ. रवि मोहन लिखा हुआ था। नोटिस भी चस्पा था, जिस पर डॉक्टर न होने पर मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे की सूचना लिखी थी।
अंदर मरीजों की फाइल मिली। इससे स्वास्थ्य विभाग की टीम को आशंका है कि निरीक्षण से पहले सूचना लीक होने पर मरीजों को यहां से हटा दिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि डॉ. छाबड़ा का सीएमसी नाम से भी अस्पताल चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जांच कराने की बात कही।
मधुवन हॉस्पिटल में मरीज भर्ती पर लगाई रोक
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सी ब्लाक स्थित मधुवन हॉस्पिटल में छापा मारा। यहां डॉ. कपिल प्रकाश मिले। पचोखरा निवासी किशनवीर मिला। इसके हाथ में सेप्टिक फैल गया था। मरीज ने टीम को बताया कि उनका इलाज कपिल प्रकाश कर रहे हैं, लेकिन कपिल ने बताया कि इनका इलाज डॉ. अमित अग्रवाल कर रहे हैं।
फाइल पर किसी डॉक्टर का नाम नहीं था। 17 अगस्त को ये भर्ती हुआ था, तब से एक बार ही डॉक्टर ने देखा। चार हजार रुपये खर्च भी हो गए। यहां लगे बोर्ड पर दर्ज आठ डॉक्टरों के नाम देखकर टीम ने कपिल प्रकाश से फोन नंबर मांगे तो वो बोले उनके पास नंबर नहीं हैं।
ये अस्पताल गौरव कुमार के नाम से पंजीकृत बताया गया, छह बेड की मान्यता थी और मिले 11 बेड। यहां मेडिकल स्टोर भी था, जिस पर कोई फार्मेसिस्ट नहीं था और नहीं संचालक इसका लाइसेंस टीम को दिखा पाया।
जंग लगे उपकरण, बिखरा हुआ था बायोवेस्ट
मधुवन हॉस्पिटल की ऑपरेशन थिएटर में गंदगी पसरी हुई थी। उपकरणों में जंग लगी हुई थी। कोठरीनुमा आईसीयू था, इसमें जीवन रक्षक यंत्र भी खराब थे। बायोमेडिकल वेस्ट बिखरा हुआ था। ऐसा ही हाल केजी हॉस्पिटल में रहा। यहां ऑक्सीजन सिस्टम भी गैलरी में लगा हुआ था।
यमुनापार में अस्पताल दुकानों में चल रहे हैं। यहां आग से निपटने के लिए इंतजाम नहीं हैं और नहीं फायर सिस्टम लगा। प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ नहीं है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग ने दोनों अस्पतालों को सील नहीं किया।
पहले बताया गया कि इनका पंजीकरण नहीं है। इन्होंने आवेदन कर रखा है। रिन्यूवल नहीं हुआ। जबकि नियमानुसार रिन्यूवल न होने तक पंजीकरण स्वत: समाप्त माना जाता है। मीडिया के प्रश्नों पर एसीएम और एसीएमओ ने इनके लाइसेंस की जानकारी करने की बात कही है।
एसीएम द्वितीय वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि केजी हॉस्पिटल में कोई मरीज और डाक्टर नहीं मिला। संचालक भी भाग गया। स्वास्थ्य विभाग ने दोनों अस्पतालों के पंजीकरण होने की बात कही है। नोटिस देकर पंजीकरण एवं अन्य विभागों की एनओसी मांगी है।
एसीएमओ डॉ अजय कपूर ने बताया कि दोनों अस्पताल पंजीकरण हैं। बोर्ड पर दर्ज डॉक्टरों से बात नहीं हुई है। नोटिस चस्पा कर मरीज भर्ती करने पर रोक लगा दी है। पंजीकरण की जांच की जा रही है। रिन्यूवल न होने पर दोनों अस्पताल सील किए जाएंगे।