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10 हजार रुपये में मरीज का होता है सौदा, ऐसा है आगरा में इलाज का जाल

Sat, 20 Jan 2018 03:36 PM IST
न्यूज डेस्क अमर उजाला आगरा
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तीन बार बदला इस अस्तपाल का स्‍थान - फोटो : अमर उजाला
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आगरा में इलाज के नाम पर मरीजों से वसूली करने वाले झोलाछाप की दुकान क्वालीफायड डाक्टर चला रहे हैं। इनके हास्पिटल में डाक्टर कॉल पर इलाज करने पहुंचते हैं। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग के छापे में हुआ है। 
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जिन झोलाछाप के हास्पिटल सील किए गए हैं, उनके बाहर विशेषज्ञ डाक्टरों के बोर्ड लगे हुए हैं। एक नहीं दो नहीं बल्कि लगभग हर मर्ज के विशेषज्ञों के नाम हैं। यही डाक्टर झोलाछाप की कॉल पर मरीज को देखने पहुंचते हैं। 

आपरेशन की बात आए तो इसमें भी पीछे नहीं हटते। इसके एवज में डाक्टर की प्रति कॉल और आपरेशन के लिए मोटी फीस मिलती है। 

एसीएमओ डा. अजय कपूर ने बताया कि झोलाछाप के यहां छापे में पता चला कि कॉल पर क्वालीफायड डाक्टर इलाज करने पहुंचते थे। इनकी सूची आईएमए को दी जाएगी। 

सीएमओ डा. मुकेश वत्स का कहना है कि सील किए गए अस्पताल के झोलाछापों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इनकी रिपोर्ट बनाई जा रही है। संबंधित थानों में इन हास्पिटलों में दोबारा चिकित्सकीय कार्य होने पर कार्रवाई के लिए भी पत्र भेजा है। 

आईएमए अध्यक्ष डा. रविंद्र मोहन पचौरी ने कहा कि झोलाछाप के यहां इलाज देने वाले डाक्टरों का बहिष्कार किया जाएगा। बैठक में निंदा प्रस्ताव भी पारित होगा। सभी चिकित्सकों से झोलाछाप के यहां सेवाएं न देने की अपील भी की जाती है। 

ऐसा होता है मरीज सौदा

झोलाछाप अपने अस्पताल में मरीजों को खरीदते थे। झोलाछाप के यहां मरीज को लाने वाले दलाल को प्रति मरीज 10 हजार रुपये मिलते हैं। इसमें सबसे बड़ी भूमिका एंबुलेंस चालक और देहातों में क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप हैं। 

यही मरीजों को सस्ता इलाज और जानपहचान का हवाला देकर तय हास्पिटल में छोड़ जाते थे। खास बात मरीज के हास्पिटल में भर्ती होते ही 10 हजार रुपये मौके पर ही दे दिए जाते हैं। 

फिर भर्ती मरीज से शुरू हो जाता है वसूली का खेल। इलाज में तमाम जांच समेत गंभीर बीमारी बताकर उनको कई दिनों तक भर्ती रखा जाता था। 

हास्पिटल पंजीकरण की होगी जांच

स्वास्थ्य विभाग अब पंजीकृत हास्पिटलों का पुन: सत्यापन करने जा रहा है। इसमें सबसे पहले एक नाम से तीन या उससे अधिक हास्पिटल, क्लीनिक की जांच की जाएगी। 

निरीक्षण कर पता लगाया जाएगा कि जिस डाक्टर के नाम से अस्पताल पंजीकृत है, वहां वह प्रैक्टिस करते हैं कि नहीं। जिले में 1250 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत हैं। 

इसमें कई ऐसे चिकित्सक हैं, जिन्होंने अपने नाम से कई चिकित्सकीय संस्थानों का पंजीकरण करा रखा है। 
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झोलाछाप के खिलाफ होगा मुकदमा

सील किए गए हास्पिटल के संचालक झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारी कर रहा है। साथ ही सील किए गए हास्पिटल के संबंधित थानों को पत्र भेजा गया है।

जिसमें स्वास्थ्य विभाग ने दोबारा इसमें हास्पिटल चलाने पर कानूनी कार्रवाई को कहा है। नेहरू नगर स्थित अर्श हास्पिटल, यमुनापार स्थित मनोहर हास्पिटल, शास्त्रीपुरम स्थित दिव्यांशी हास्पिटल और बोदला रोड स्थित सुदर्शन हास्पिटल को सील कर दिया था। 

अनमोल हास्पिटल का साल में तीन बार स्थान बदला गया। पहले लंगड़े की चौकी पर ये हास्पिटल चलता था। फिर ट्रांस यमुना कॉलोनी सी-ब्लाक में खोला गया। पिछले साल ही यहां हास्पिटल बंद कर इसे मंडी समिति के पास खोला गया। 
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