आगरा में निजी अस्पतालों के संचालकों ने मनमानी कर वार्ड-आईसीयू में स्वीकृति से डेढ़ गुना बेड बढ़ा लिए। पैथोलॉजी लैब में पैनल के पैरामेडिकल स्टाफ और डॉक्टर नहीं मिले। आईसीयू में जीवनरक्षक उपकरण भी कामचलाऊ पाए गए। मरीजों की जान से खिलवाड़ होते देख स्वास्थ्य विभाग ने 52 अस्पताल-लैब के लाइसेंस पर रोक लगा दी है।
स्वास्थ्य विभाग में बीते साल 487 अस्पताल पंजीकृत हुए थे। इनको अब पांच साल के लिए (2025-30 तक के लिए) लाइसेंस दिया जाएगा। संचालकों ने 17 बिंदुओं पर ऑनलाइन आवेदन के बाद स्वास्थ्य विभाग से भौतिक सत्यापन कराया, तो गड़बड़ी पकड़ी गई। अस्पतालों में स्वीकृत बेड से 10-15 बेड, वार्ड में सटाकर लगाए गए थे। आईसीयू में 3-5 बेड अतिरिक्त मिले।
पैनल में जिन प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ का नाम और डिग्री प्रस्तुत की गई थी, उनमें से कई माैके पर नहीं मिले। यही हाल आईसीयू के चिकित्सकों का रहा। विशेषज्ञ नहीं थे, नर्सिंग स्टाफ ही मौजूद था। इनमें वेंटिलेटर समेत जीवनरक्षक उपकरण खराब हालत में पाए गए। मेडिकल वेस्ट को भी तय डिब्बों में न रखकर स्टोर और कोने में जमा किया गया था।
अस्पतालों में मरीजों के भर्ती, डिस्चार्ज का कोई रिकाॅर्ड नहीं रखा जा रहा था। मरीजों के इलाज के पर्चे पर चिकित्सक का नाम, उसकी डिग्री भी नहीं दर्ज थी। यहां तक कि मरीजों को इलाज और खर्च का बिल भी नहीं दिया जा रहा था। कुछ अस्पतालों में अवैध रूप से मेडिकल स्टोर भी संचालित मिला।
खून की जांच करते पकड़ा गया अप्रशिक्षित
विभाग में 150 पैथोलॉजी लैब पंजीकृत हैं, इनमें भौतिक सत्यापन करने में मौके पर चिकित्सक नहीं मिले। रक्त संबंधी जांच करने वालों पर जरूरी शैक्षणिक योग्यता नहीं मिली। रिपोर्ट पर भी चिकित्सक की मुहर तक नहीं थी। मशीन और उपकरणों का रखरखाव खराब था।
सुधार के लिए दिया नोटिस, अभी नवीनीकरण रोका
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 1317 में से करीब 450 के लाइसेंस नवीनीकरण कर दिए हैं। वार्ड में अतिरिक्त बेड हटवाने के साथ आईसीयू, मेडिकल वेस्ट निस्तारण, विशेषज्ञ नहीं मिलने समेत अन्य वजह पर 50-52 अस्पताल-लैब के लाइसेंस रोक दिए हैं। सुधार के लिए नोटिस दिया है।
चिकित्सकीय मानक पालन करना है जरूरी
आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनूप दीक्षित का कहना है कि अस्पताल-लैब के लिए मानक और नियम अपनाने जरूरी हैं। आईएमए के चिकित्सक इनका पालन कर रहे हैं, कुछ कमी है तो उसे पूरा करने को भी निर्देशित किया है। गड़बड़ी अधिकांश नॉन मेडिको संस्थानों में हैं। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग को भी अवगत करा दिया है।
बीते साल पंजीकृत चिकित्सकीय संस्थान
492: क्लीनिक
487: अस्पताल
150: पैथोलॉजी लैब
103: डायग्नोस्टिक सेंटर
85: डेंटल क्लीनिक