राजस्थान, हिमाचल, हरियाणा मध्यप्रदेश, गुजरात, केरल बर्ड फ्लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए आगरा जिले में इलाज और संक्रमण रोकने के लिए व्यवस्था की गई है। जिला अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड में संदिग्ध मरीज भर्ती किए जाएंगे। इनके इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग को सात हजार टैमीफ्लू टैबलेट मिल गई हैं ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि वैसे तो अभी बर्ड फ्लू से संदिग्ध मरीज नहीं मिला है । फिर भी तैयारियां पूरी हैं। कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के कारण व्यवस्थाएं पहले से ही दुरुस्त हैं। जिला अस्पताल में कोरोना वायरस के मरीजों के लिए बने एक वार्ड में बर्ड फ्लू के संदिग्ध मरीजों को भर्ती किया जाएगा। इलाज के लिए 7000 टैमीफ्लू टैबलेट भी मिल गई हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि एसएन की वायरोलॉजी लैब में बर्ड फ्लू के नमूनों की जांच की सुविधा है। इनकी भी स्वाइन फ्लू और कोरोना वायरस की तरह ही जांच है।
कोरोना वायरस जैसे ही हैं लक्षण
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजिस्ट डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि इन्फ्लुएंजा ए एच5एन1 से बर्ड फ्लू फैलता है। पोल्ट्री फार्म में काम करने वालों में इसका खतरा अधिक है। इसके लक्षण भी स्वाइन फ्लू और कोरोना जैसे ही हैं। इसमें भी बुखार आना, बेचैनी, शरीर में दर्द, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी होती है।
इन बातों का रखें ख्याल
- पक्षियों के संपर्क में आने से बचें।
- छत पर रखी टंकी, रैलिंग को डिटरजेंट से धोएं।
- पक्षियों और उसके मल को हाथों से न छुएं।
- कच्चा मांस न छुएं, पोल्ट्री फार्म पर जाने से बचें।
- पोल्ट्री फार्म में काम करने वाले लोगों से बचें।
- मरे हुए पक्षी को हाथ नहीं लगाएं।
(जैसा एसएन कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. संदीप सिंह ने बताया)