मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार की ओर से राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले हरिहरानंद महाराज ने कहा कि मेरा नाम किसी मंत्री पद से न जोड़ा जाए।
बोले मेरे नाम के साथ संन्यासी शब्द जुड़ा है और यह शब्द ही काफी है। हालांकि उन्होंने मंत्री पद को ठुकराया नहीं और कहा कि सेवाभाव के रूप में इस पद को ग्रहण करेंगे।
वह गुरुवार को यूपी के मैनपुरी स्थित एकरसानंद आश्रम में पत्रकारों से मुखातिब थे। राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद उन्होंने पहली बार मीडिया से बातचीत की।
Shivraj singh Chauhan
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिना पूछे मुझे यह दायित्व सौंपा है। बाबाओं को पद से क्या लेना, मैं तो अपने गुरु की आज्ञा पर सेवाभाव के रूप में दायित्व ग्रहण कर रहा हूं।
क्योंकि शासन के सहयोग से नर्मदा की सेवा को बल मिलेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह सरकार की ओर से मिलने वाली सरकारी सुख-सुविधाओं को ग्रहण नहीं करेंगे। गाड़ी, बंगला और वेतन आदि नहीं लेंगे।
मामला हाईकोर्ट में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह भाजपा की कमेटी में हैं, राजनीति में नहीं। पूर्ण राजनीतिक दात्यिव कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
पांच बाबाओं को दिया है राज्यमंत्री का दर्जा
नर्मदा किनारे के इलाकों में पौधरोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता सहित अन्य विषयों के जनजागरण के लिए मध्य प्रदेश शासन ने हाल में ही एक समिति का गठन किया है।
इस कमेटी में हरिहरानंद महाराज सहित कंप्यूटर बाबा, भय्यू महाराज, नर्मदानंद, योगेंद्र महंत को सदस्य बनाया गया है। सभी सदस्यों का दर्जा राज्यमंत्री का है।
पत्रकारों से बातचीत में हरिहरानंद महाराज ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से निकाली गई नर्मदा सेवा यात्रा में वह खुद शामिल हुए थे। वह एकात्म यात्रा से भी जुड़े।
कहा कि यात्रा पर सिर्फ यात्रा खर्च का ही व्यय हुआ। यात्रा में घोटाला कैसा। उन्होंने कहा कि नर्मदा के संरक्षण के लिए यह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सराहनीय प्रयास था।