दीवारों को सजाने के लिए की गई पच्चीकारी
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प्रतापपुरा पर खुला था आगरा का पहला मार्बल शोरूम
नेशनल चैंबर के पूर्व अध्यक्ष एवं पर्यटन उद्यमी राजीव तिवारी बताते हैं कि आगरा में मार्बल हैंडीक्राफ्ट मुगलकाल से चला आ रहा है। पहले चुनिंदा कारीगर जुड़े हुए थे। हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए आगरा में पहला मार्बल शोरूम इंडियन मार्बल फूलचंद बंसल ने 1962 में शुरू किया था।
यहां कलाकारों को प्रोत्साहन देने के लिए उनकी कलाकृतियों के वाजिब दाम दिए जाते थे। शुरुआती दिनों में यहां विदेशी सैलानी ही आते थे। इसके बाद ओसवाल सहित अन्य कारोबारियों ने एंपोरियम खोले, जिससे विदेशों में आगरा के हस्तकला को पहचाने जाने लगा। इसके बाद ही हस्तशिल्प को बड़ा बूम मिला।
90 के दशक में आई भारी गिरावट
वैश्विक आर्थिक मंदी और देश में पैदा हुए हालात के बाद 90 के दशक में एक बार फिर से मार्बल इंडस्ट्री पर संकट आया। बाजार में गिरावटआई। मार्बल के उत्पादों की डिमांड कम हो गई। इसके बाद सिलसिला चलता रहा। कोरोना काल में वर्ष 2019-20 का दौर भी मार्बल इंडस्ट्री के बुरे दौर में गिना जाता है।
तंग गलियों से फैक्टरी तक का सफर
सैकड़ों साल से गोकुलपुरा और ताजगंज की तंग गलियों में पच्चीकारी और मार्बल उत्पाद बनाने वाले कारीगर काम करते थे। अब मार्बल उत्पाद बनाने के कारखाने औद्योगिक एरिया शास्त्रीपुरम में शिफ्ट हो चुके हैं।