फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

AmarUjala75: दिशा दिखाते हैं अमर उजाला के लेख, पुस्तकालय में इसका होना एक उपलब्धि था...ये हैं हमारे नायक

Tue, 18 Apr 2023 11:34 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

AmarUjala75: कोई भी जीवंत समाज अपने नायकों से ही प्रेरणा पाता है। ये नायक कई बार अतीत तो कई बार वर्तमान से होते हैं। हमारे सुधी पाठकों ने अपने-अपने क्षेत्र की ऐसी ही कुछ शख्सियतों से हमें परिचित कराया, जिन्होंने अपने कार्यों से स्वयं को नायक कहलाने का हक पाया। 
विज्ञापन
ये हैं अमर उजाला के नायक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

AmarUjala75: अमर उजाला आज अपना 75वां स्थापना दिवस मना रहा है। 18 अप्रैल, 1948 को ताजनगरी आगरा से एक नए संकल्प के साथ इसका शुभारंभ हुआ। आज यह अपने इस महती दायित्व के 75 वर्ष पूर्ण कर रहा है। अमर उजाला की इस यात्रा पर अमर उजाला के सुधी पाठकों ने अपनी-अपनी राय दी है। इनमें बहुत से लोग हैं जो तीन पीढ़ी से हमारे पाठक हैं। आइए उन्हीं की जुबानी सुनते हैं कि वह क्या कहते हैं...  

विज्ञापन


पिता 96 वर्षीय पं. विद्याराम शर्मा की आंखें कमजोर हो चुकी हैं लेकिन अखबार पढ़ने का शौक नहीं गया। लिहाजा अब सुनकर ही काम चलाते हैं। घर में शुरू से ही अमर उजाला अखबार आता था। तीन पीढि़यों से पढ़ रहे हैं। अपना पीएमटी का रिजल्ट भी मैंने अमर उजाला में ही देखा था। पिताजी डीएवी इंटर कॉलेज मोती कटरा में पहले शिक्षक और फिर प्रधानाचार्य रहे। आज भी पिताजी शहर के समाचार न सुन लें तो उन्हें चैन नहीं आता। मां ओमवती भी 94 वर्ष की उम्र में अमर उजाला पढ़ने का मौका किसी दिन भी नहीं चूकतीं। लोग विश्वसनीय सूचना के लिए अमर उजाला को प्राथमिकता देते हैं। अमर उजाला को उसके 75 पूरे होने पर हार्दिक शुभकामनाएं। -डॉ. डीवी शर्मा

पुस्तकालय में अमर उजाला होना एक उपलब्धि था

वर्ष 1976 में जब मैं प्राइमरी पाठशाला कुर्री कूपा, फिरोजाबाद से कक्षा पांच उत्तीर्ण कर जनता विद्यालय अलीनगर केंजरा फिरोजाबाद में कक्षा छह में प्रवेश लेने पहुंचा। मैं बहुत उत्सुक था वहां के पुस्तकालय को देखकर। वहां के शिक्षकों ने विद्यालय के तमाम अच्छाइयों के साथ बताया कि हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में अमर उजाला भी आता है। आप मध्यांतर में अमर उजाला पढ़ सकते हैं। विद्यालय में प्रवेश लेने के बाद मैंने नियमित रूप से अमर उजाला पढ़ने लगा। हाथरस जंक्शन कस्बे में मैनें कक्षा 10 प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसमें अमर उजाला का भी योगदान रहा, इसको सबसे पहले पढ़ने के लिए सुबह जल्दी जागने की आदत बन गई। 

अमर उजाला ने हमारा साथ अलीगढ़ में नौरंगीलाल राजकीय इंटर कॉलेज से कक्षा 11वीं से लेकर धर्म समाज इंटर कॉलेज अलीगढ़ से एलएलबी करने तक दिया। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने में प्रमुख भूमिका निभाई। अमर उजाला ने न सिर्फ हमारे सामान्य ज्ञान में संवर्धन किया बल्कि विभिन्न पदों की भर्ती के विज्ञापन देने में भी अहम भूमिका निभाई है। अमर उजाला समय के साथ कदमताल कर रहा है। अमर उजाला परिवार को हार्दिक बधाई।  -डॉ. सत्य प्रकाश, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, राजकीय इंटर कॉलेज, आगरा

किले के सामने शिवाजी की मूर्ति लगवाने में रहा योगदान

10 साल की उम्र से पढ़ना शुरू कर दिया था अमर उजाला। जिंदगी के हर संघर्ष और खुशी में साथ नहीं छूटा। आगरा शहर छोड़ने के बाद भी अमर उजाला को डाक से मंगवाकर पढ़ते रहे। आज भी सुबह उठकर सबसे पहले अमर उजाला पढ़ते हैं। युवा अवस्था में संघ से जुड़े हुए थे। लाल किले के सामने छत्रपति शिवाजी की मूर्ति लगनी थी। इस के लिए छत्रपति शिवाजी स्मारक समिति बनी थी। इस समिति का मार्ग दर्शन डोरी लाल जी ने किया था। अपने अखबार में कई खबर प्रकाशित की। उसके बाद मूर्ति लगी। उस समय धूलियागंज में एक छोटे से कमरे में अखबार का कार्यालय होता था। अमर उजाला को 75वीं वर्षगांठ के लिए बधाई। -डॉ. जीसी सक्सेना, पूर्व कुलपति, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
विज्ञापन

दिशा दिखाते हैं अमर उजाला के लेख

अमर उजाला की खबरें युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करती हैं। कोरियोग्राफी और मॉडलिंग की तरफ मेरा रुझान अमर उजाला में प्रकाशित होने वाली खबरों और लेखों को देखकर बना। बचपन से ही मुझे नृत्य करने का शौक था। सन 2004 में अमर उजाला में कोरियोग्राफी और करियर को लेकर लेख छपा था। वह मेरे करियर के लिए काफी अहम साबित हुआ। अमर उजाला की खबरें पढ़कर उत्साहवर्धन होता था। लगता था कि हम भी कुछ कर सकते हैं। अमर उजाला से मिली इसी सोच के दम पर सन 2006 में मिस आगरा का और सन 2008 में मिस यूपी फिरोजाबाद का ताज अपने नाम किया। इसके साथ ही स्टार वन के श्श्श् फिर कोई है... सीरियल के तीन एपिसोड में भी अभिनय करने का अवसर मिला। नंदनी 1000 से ज्यादा बच्चों को नृत्य सिखा चुकी हैं। -नंदनी शर्मा, मॉडल व कोरियोग्राफर-दयालबाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें