ओलावृष्टि और बारिश के बाद खेत में पड़ी गेहूं की फसल को उठाते किसान।
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गेहूं खरीद प्रक्रिया में फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता खत्म होने के बाद अब किसानों के सामने एक और व्यावहारिक समस्या खड़ी हो गई है। हाल की ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के कारण खरीद केंद्रों पर कई किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसान नेता मोहन सिंह चाहर ने बताया है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित गेहूं की चमक और गुणवत्ता में आई गिरावट किसानों की गलती नहीं है, बल्कि मौसम की मार है। ऐसे में खरीद मानकों में लचीलापन जरूरी है, ताकि प्रभावित किसान अपनी उपज बेच सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता समाप्त कर किसानों को राहत दी गई है।
अब जरूरत है कि आपदा प्रभावित फसल को भी उसी तरह राहत दी जाए। वहीं, जिला खाद्य विपणन अधिकारी नंदकिशोर ने बताया कि ओलावृष्टि और बारिश से प्रभावित गेहूं की खरीद के लिए नियमों में ढील देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से आदेश मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे फिलहाल बिना बारिश से प्रभावित हुए गेहूं को ही खरीद केंद्रों पर लेकर आएं। वर्तमान में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल है।