आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। गुरु और शिष्य के रिश्ते का यह पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। शिष्य अपने गुरुजनों की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस अवसर पर गोवर्धन के मुड़िया पूर्णिमा मेला में तो लाखों भक्त आते हैं।
गुरु पूर्णिमा को लेकर कई मान्यताएं हैं। सबसे खास यह कि गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास में ही क्यों मनाया जाता है? गोवर्धन धाम के चैतन्य हरि चरत के अनुसार गुरु पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह है, जो पूर्व प्रकाशमान है और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह है।
उन्होंने बताया कि आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है। वैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरु घिरे हैं। शिष्य अंधेरे बादल की तरह ही है। उस अंधेरे वातावरण में जो ज्ञान रूपी प्रकाश जगाता है, वो ही गुरु होता है। इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है।