दुनिया भर में कोहराम मचाने के बाद भारत में तेजी से अपना शिकंजा कंस रहे ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ गेम से आगराइट्स भी भयभीत हैं। माता-पिता अपने बच्चों पर निगाह रख रहे हैं। उन्हें इस मौत के खेल से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं।
स्कूलों में शिक्षक भी विद्यार्थियों से ऐसे भ्रामक वीडियो गेम से सचेत रहने की सलाह दे रहे हैं। बच्चों के माता-पिता से भी उनके द्वारा इंटरनेट पर की जा रही गतिविधियों पर निगरानी रखने की सलाह दी जा रही है।
मनोरोग विशेषज्ञ डा. यूसी गर्ग का कहना है कि ब्लू व्हेल चैलेंज गेम एक खूनी खेल के जैसा है। यह अपरिपक्व मस्तिष्क पर ज्यादा गहरा असर कर रहा है। इसका परिणाम है कि देश में छह बच्चों ने इस खेल में अपनी जान गवाई है।
यह एक प्रकार का मानसिक रोग है, जिसमें बच्चे किसी खेल में चैलेंज पूरा न कर पाना अपनी हार मानते हैं। इसके लिए नियमित तौर पर अभिभावकों के साथ ही शिक्षकों को भी बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है। जागरूकता ही इससे बचाव कर सकती है।