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जीएसटी चोरी: फर्जी निर्यात दिखाकर सरकार से वसूले करोड़ों रुपये, ऐसे पकड़ में आया कारोबारी; जमा करना पड़ा टैक्स

Sun, 07 Sep 2025 11:10 AM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

अधिकारियों को जांच में दोपहिया वाहनों के टायर के अलावा ऑटो पार्ट्स का कोई स्टॉक नहीं मिला। विभाग ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि फर्म के डायरेक्टर ने अपनी ही दूसरी फर्म मेसर्स संजय कुमार तरुण कुमार से कागजों में ऑटो पार्ट्स की खरीद दिखाकर नेपाल की फर्मों को एक्सपोर्ट दिखाया। 
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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अलीगढ़ के दो टायर व दोपहिया ऑटो पार्ट्स फर्म मालिकों ने कागजों पर नेपाल सामान एक्सपोर्ट करने का झांसा देकर सरकार से करोड़ों रुपये का रिफंड वसूल लिया। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर आयुक्तालय आगरा की एंटी इवेजन शाखा ने जब दोनों फर्म के ठिकानों की जांच की तो चोरी का खुलासा हुआ। सीजीएसटी ने 1.10 करोड़ रुपये का टैक्स जमा कराने के साथ ही दोनों फर्म के पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।
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सीजीएसटी आगरा की एंटी इवेजन शाखा के अधिकारियों ने अलीगढ़ के प्रमुख टायर विक्रेता मेसर्स एसकेटीके सोलूशन प्राइवेट लिमिटेड एवं मेसर्स संजय कुमार तरुण कुमार के पंजीकृत ठिकानों पर छापा मारा। बुधवार से शुरू हुई दो दिन की कार्रवाई के दौरान दोनों फर्म के ठिकानों पर जांच के दौरान पता चला कि मेसर्स एसकेटीके सोलूशन ने दोपहिया वाहनों के ऑटो पार्ट्स का फर्जी एक्सपोर्ट दिखाकर सरकार से करीब एक करोड़ का रिफंड ले लिया। 

 
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खास बात यह है कि फर्म के पंजीकृत परिसर में अधिकारियों को दोपहिया वाहनों के टायर के अलावा ऑटो पार्ट्स का कोई स्टॉक नहीं मिला। विभाग ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि फर्म के डायरेक्टर तरुण वार्ष्णेय ने अपनी ही दूसरी फर्म मेसर्स संजय कुमार तरुण कुमार से कागजों में ऑटो पार्ट्स की खरीद दिखाकर नेपाल की फर्मों को एक्सपोर्ट दिखाया। 

फिर इसी एक्सपोर्ट को दिखाकर जीएसटी रिफंड की चोरी की जबकि वास्तव में कोई माल एक्सपोर्ट नहीं हो रहा था। चोरी पकड़े जाने पर फर्म मालिक ने 1.10 करोड़ रुपये का जीएसटी जमा कर दिया। हालांकि विभाग अब उनके पुराने रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि रिफंड लेने के लिए इस्तेमाल किए गए फर्जी दस्तावेज के बारे में फर्म मालिक के खिलाफ जांच पूरी होने पर एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।

 
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