मैनपुरी। ग्राम पंचायतों में होने वाली अनियमितताओं में प्रशासन ने एक बार फिर सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे ही एक मामले में अनियमितता तो मिलने पर प्रशासन ने प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारी सीज कर दिए।
विकास खंड बेवर की ग्राम पंचायत मद्दापुर धर्म में एक शिकायत पर तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ने जांच कराई थी। जांच का जिम्मा उप क्रीड़ा अधिकारी और अवर अभियंता को सौंपा गया था। जांच रिपोर्ट आई तो उसमें 2.78 लाख का फर्जीवाड़ा समाने आया।
वर्ष 2017-18 में प्रधान रमेश चंद्र द्वारा इंटरलॉकिंग गली के निर्माण के लिए ये धनराशि निकाली गई थी। इस रिपोर्ट पर जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने प्रधान को 95जी का नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस पर प्रधान रमेश चंद्र ने दोबारा जांच कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी ने एसडीएम भोगांव सुधीर कुमार और डीपीआरओ स्वामीदीन को संयुक्त जांच करने के आदेश जारी किए थे। जांच की तो पता चला कि पंचायत में एक विवाद के चलते निर्माण नहीं हो सका, जबकि प्रधान की ओर से सामान तो मंगाया गया है।
गहन जांच में केवल 13 हजार रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया। इसकी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया को सौंपी गई थी। सीडीओ की संस्तुति पर जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने प्रधान रमेश चंद्र के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करते हुए रिकवरी के आदेश जारी किए हैं।
ये था मामला
गांव मद्दापुर धर्म निवासी पातीराम ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। इसमें ग्राम पंचायतों में हुए कार्यों में प्रधान और सचिव द्वारा फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया था। डीएम ने मामले में उचित कार्रवाई के लिए सीडीओ को आदेशित किया था, इसके बाद समिति गठित कर जांच के आदेश दिए गए।
समिति करेगी विकास कार्यों का संचालन
जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने प्रधान के अधिकार सीज करने के बाद विकास कार्यों के संचालन के लिए समिति गठित कर दी है। इसमें तीन पंचायत सदस्यों को शामिल किया गया है। समिति में राखी शाक्य, उमेश चंद्र और शिवदयाल को चुना गया है। समिति और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से अब विकास कार्य कराए जाएंगे।
अनियमितता कम हो या अधिक उसे माफ नहीं किया जाएगा। सीडीओ की संस्तुति पर डीएम ने मद्दापुर धर्म के प्रधान के अधिकार सीज कर दिए हैं। विकास कार्यों के संचालन के लिए समिति का गठन किया गया है।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।