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इस योजना से बदलेगी श्रमिकों की तकदीर, राज्यपाल ने कहा- यह काम मुश्किल है, असंभव नहीं

Tue, 26 May 2020 12:10 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से 'प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी और उत्तर प्रदेश का ग्रामीण विकास' विषय पर आयोजित वेबिनार में विचार रखे। 
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वेबिनार को संबोधित करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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'एक जिला, एक उत्पाद' की तर्ज पर कृषि विश्वविद्यालयों को 'एक जिला, एक फसल' योजना पर काम करने का निर्देश दिया गया है। इससे गांवों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। रोजगार की तलाश में लोगों को गांव से शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। यह काम मुश्किल है पर असंभव नहीं। ये बातें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को आयोजित वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए कहीं। इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा मुख्य अतिथि थे।
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वेबिनार का विषय 'प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी और उत्तर प्रदेश का ग्रामीण विकास' था। राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलाधिपति ने कहा कि कोरोना वायरस की परिस्थिति को देखते हुए लॉकडाउन का निर्णय उचित रहा। इस दौरान सबसे बुरा असर श्रमिकों व कामगारों पर पड़ा। लाखों की संख्या में प्रवासी श्रमिक व कामगार परिवार के साथ घर वापसी की। तमाम लोगों ने पैदल व साइकिल से सफर किया और मुश्किलों का सामना किया।


उन्होंने कहा कि 23 लाख कामगार व श्रमिक विभिन्न राज्यों से उत्तर प्रदेश में आए हैं। सवाल उठता है कि लॉकडाउन समाप्त होने के बाद ये प्रवासी व कामगार अपने कामों पर लौटेंगे या नहीं?  हमें सोचना होगा कि जो दूसरी जगह जाकर विकास कर सकते हैं, वो अपने प्रदेश में रहते रोजगार पा सकते हैं। यहां कृषि योग्य और अन्य संसाधन हैं। 
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'हर जिले की अपनी एक विशिष्टता'

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिला किसी न किसी उत्पादन के लिए विख्यात है। प्रत्येक जिला कोई न कोई विशिष्टता रखता है। विशेष उत्पादों की ब्रांडिंग करनी होगी। हमें शहरों के साथ गांवों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा। 70 फीसदी आबादी गांवों में हैं। आवश्यक सुविधाएं पहुंचाकर विकास की रूपरेखा खींची जा सकती है। 

राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती कर सकते हैं। संकट को अवसर में बदल कर हम नए भारत का निर्माण कर सकते हैं। हमें अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों का निर्माण और उसका प्रसार करना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रवासी आयोग बनाने का निर्णय सराहनीय है। उम्मीद है कि कामगारों व श्रमिकों के रोजगार के लिए उल्लेखनीय प्रयास करेगा। 

श्रमिकों को उनकी कुशलता के अनुरूप मिलेगा रोजगार

उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि लॉकडाउन में श्रमिकों को अधिक परेशानी उठानी पड़ी। जहां काम काम करने गए थे, वहां खाने के लाले पड़े, वेतन बंद हो गया और अपने मूल निवास की ओर निकले पड़े। तमाम लोग पैदल चल दिए। 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाहर रहने वाले श्रमिकों व छात्रों को घर लाने के लिए सबसे पहले कदम उठाया।  27000 बसें इस कार्य में लगाई गईं। जिन श्रमिकों को लाया गया है, उनकी कौशल की स्क्रीनिंग मुख्यमंत्री ने कराई है। 

श्रमिकों को उनकी योग्यता के अनुसार काम देने की योजना है। वह मनरेगा, छोटे उद्योग आदि में हो सकती है। जिससे श्रमिकों को बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े। प्रवासी  आयोग बनाने का उद्देश्य श्रमिकों को रोजगार में समायोजित करना है। 
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'आत्म निर्भर राष्ट ही दीर्घकाल तक रह सकता है'

वेबिनार के विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि आत्मनिर्भर राष्ट्र ही दीर्घकाल तक रह सकता है। राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी पर बल देना होगा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा के कुलपति प्रो. बीपी शर्मा ने स्थानीय सर्वेक्षण करवाकर स्थानीयता की विशिष्टता के अनुरुप ब्रांड विकसित किए जाने चाहिए। इससे रोजगार सर्जन व आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी। 
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