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UP: जनता पर जुर्माना, जहरीला धुआं उड़ाते हुए हुक्मरानों की गाड़ियां भर रहीं फर्राटा; देखें ये रिपोर्ट

Tue, 30 Jun 2026 12:54 PM IST
Dhirendra Singh देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

टीटीजेड में 1,279 सरकारी वाहनों में से 1,116 के पास प्रदूषण जांच (PUC) प्रमाणपत्र नहीं है, जबकि बिना पीयूसी वाले निजी वाहनों पर लगातार जुर्माना लगाया जा रहा है। परिवहन विभाग ने सभी सरकारी वाहनों की जांच कराने और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।
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जहरीला धुआं उड़ाते हुए हुक्मरानों की गाड़ियां भर रहीं फर्राटा - फोटो : AI
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विस्तार
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ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाए गए ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में सरकारी महकमे ही हवा में जहरीला धुआं घोल रहे हैं। एक ओर जहां बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) वाली जनता की गाड़ियों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की गाड़ियां बिना रोक-टोक फर्राटा भर रही हैं। जिम्मेदार ही टीटीजेड में प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
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टीटीजेड प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप को 1 जून को भेजी गई परिवहन विभाग की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं। आगरा में 50 से अधिक सरकारी विभागों के पास कुल 1279 वाहन हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 1,116 (यानी 87%) सरकारी गाड़ियों के पास प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र ही नहीं है। वहीं, जिले में 13 लाख से अधिक निजी वाहन पंजीकृत हैं लेकिन कितनों ने प्रदूषण जांच कराई, इसका रिकॉर्ड तक परिवहन विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।

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आम जनता के बिना पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) वाले हजारों निजी वाहनों का चालान काटकर 2.50 लाख रुपये से अधिक शमन शुल्क वसूला जा चुका है। वहीं, दूसरी ओर खुद सरकारी गाड़ियां बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के सड़कों पर धुआं छोड़ रही हैं। जिले की 1,279 सरकारी गाड़ियों में सबसे बड़ी संख्या पुलिस और प्रशासन के वाहनों की है। चार पहिया वाहन का प्रदूषण जांच शुल्क मात्र 150 रुपये है।


नियम जनता के लिए सख्त
आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2022 से अब तक आगरा में 15 हजार से अधिक निजी वाहनों पर बिना पीयूसी के दंडात्मक कार्रवाई की गई। वाहन स्वामियों से भारी-भरकम जुर्माना वसूला गया। वहीं पंजीकृत कुल 1279 राजकीय वाहनों में से मात्र 163 वाहनों ने ही प्रदूषण की जांच कराकर प्रमाणपत्र लिया है।

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मथुरा और अन्य जिले भी सवालों के घेरे में
रिपोर्ट के मुताबिक, मथुरा में 519 राजकीय वाहनों में से एक भी वाहन का पीयूसी नहीं बना था। वहीं, एटा और हाथरस जैसे जिलों से राजकीय वाहनों का डाटा तक मंडलायुक्त को नहीं भेजा गया, जो विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसके अलावा, भरतपुर के राजकीय वाहनों के आंकड़ों में भी भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं।

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डीएम को लिखा है पत्र
संभागीय परिवहन अधिकारी अखिलेश द्विवेदी ने बताया कि बिना प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र के दौड़ रही सरकारी गाड़ियों पर भी कार्रवाई होगी। उन्हें सीज कर जुर्माना वसूला जाएगा। सभी राजकीय वाहनों की प्रदूषण जांच कराने और कार्रवाई के संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है। 
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