आगरा में खंदारी स्थित डा. भीमराव आंबेडकर आईएएस/पीसीएस कोचिंग सेंटर में प्रतियोगी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कोचिंग के छात्रों ने आरोप लगाए कि सत्र समाप्त होने वाला है लेकिन अभी तक पाठ्यक्रम अधूरा है।
कुछ विषयों की कक्षाएं तक प्रारंभ नहीं हो सकी हैं। ऐसे में छात्रों का सिविल सर्विस की प्री-परीक्षा में प्रतिभाग करना भी मुश्किल हो गया है।
खंदारी स्थित डा. भीमराव आंबेडकर आईएएस/पीसीएस कोचिंग सेंटर में अनुसूचित जाति के छात्रों को सिविल सर्विस परीक्षा (प्री) की तैयारी नि:शुल्क कराई जाती है। वर्ष में पांच माह का सत्र संचालित किया जाता है।
वर्ष 2017-18 के सत्र में 105 छात्रों ने पंजीकरण कराया। हालांकि यहां वर्तमान में 65 छात्र तैयारी कर रहे हैं। इनका सत्र 24 जनवरी को समाप्त होना है। छात्रों का आरोप है कि कोचिंग प्रशासन उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
नहीं शुरू हुईं इन विषयों की कक्षाएं
सत्र में लगभग 12 विषयों की पढ़ाई करानी होती है, लेकिन अभी तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित और डाटा इंटरप्रेटेशन की कक्षाएं तक शुरू नहीं हो सकी हैं। जीव विज्ञान की शिक्षिका को पाठ्यक्रम पूर्ण होने से पहले ही कार्य मुक्त कर दिया गया।
आईएएस, पीसीएस और एसएससी की कक्षाएं एक साथ लगाई जा रही हैं, जबकि तीनों की परीक्षा प्रणाली अलग है। छात्रों ने कोचिंग सेंटर अधीक्षक पर भी आरोप लगाए हैं। आरोप हैं कि यहां छात्रावास में भी कई खामियां हैं।
पेयजल और शौचालय की सुविधा नहीं है। कई बार शिकायत करने के बाद भी मेस में दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सका है।
इस बाबत छात्रों ने मंडलायुक्त और समाज कल्याण विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर शिकायत की है। कोचिंग अधीक्षक लायक सिंह का कहना है कि लेक्चर के मुताबिक भुगतान किया जाता है। कुछ छात्रों ने बेवजह आरोप लगाए हैं।
कोचिंग सेंटर में नहीं है स्टाफ
कोचिंग सेंटर में शासन के निर्देशानुसार भी स्टाफ की तैनाती नहीं है। यहां तक की छात्रों के पाठ्यक्रम पर निगरानी रखने के लिए संविदा पर तैनात किए जाने वाले रिटायर्ड आईएएस अथवा पीसीएस स्तर का अधिकारी तक नहीं है।
कोचिंग में 10 शिक्षकों को छात्रों को पढ़ाने के लिए तैनात किया जाना है लेकिन वर्तमान में आउटसोर्स पर महज छह शिक्षक तैनात हैं। लाइब्रेरी भी भगवान भरोसे है। यहां बरसों से लाइब्रेरियन की तैनाती नहीं है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भी कमी है।
कोचिंग सेंटर में बाहरी कोचिंग इंस्टीट्यूट के शिक्षकों से पढ़ाई कराने के मामले में सपा सरकार में समाज कल्याण विभाग के कई अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है।
तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सोबरन सिंह, समाज कल्याण उपनिदेशक समेत छह अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। इसके बाद से कोचिंग इंस्टीट्यूट के स्थान पर बाहरी शिक्षकों को पढ़ाने के लिए कांट्रेक्ट पर रखा जाता है।