सीमेंट की बोरियों से लदी रेलगाड़ी के 15 डिब्बे शुक्रवार की रात करीब 11:35 बजे पटरी से उतर गए। जिसके बाद दिल्ली जाने वाली सभी रेल लाइनें बाधित हो गईं और करीब 100 से अधिक ट्रेनें बाधित हो गईं। कोई भी ट्रेन मथुरा होकर दिल्ली नहीं जा सकी।
मालगाड़ी के 15 डिब्बे पटरी से उतरने के बाद आगरा-मथुरा से विच्छेदित हुई देश की राजधानी लगभग 25 घंटे बाद रेलमार्ग से जुड़ सकी। इंजीनियरों की टीम ने शनिवार रात करीब 12:16 मिनट पर पहली ट्रेन को गुजारा।
विज्ञापन
इसके बाद इस रूट की अन्य रेल लाइनों को भी एक के बाद एक करके चालू कर दिया गया। जबकि तीसरी डाउन रेल लाइन काफी घंटे बाद ही चालू हो सकी। इंजीनियरों की टीम ने ट्रैक को दुरुस्त कर दिया।
सीमेंट की बोरियों से लदी रेलगाड़ी के 15 डिब्बे शुक्रवार की रात करीब 11:35 बजे पटरी से उतर गए। जिसके बाद दिल्ली जाने वाली सभी रेल लाइनें बाधित हो गईं और करीब 100 से अधिक ट्रेनें बाधित हो गईं। कोई भी ट्रेन मथुरा होकर दिल्ली नहीं जा सकी। टूटी पटरियों पर दोबारा से पटरियां बिछाने के लिए करीब चार सौ से अधिक इंजीनियरों और कर्मचारियों की टीम जुटी रही। जिसके बाद करीब रात 12 बजकर 18 मिनट पर चौथी रेल लाइन से दिल्ली के लिए ट्रेन गुजारी गई।
विज्ञापन
तीसरी रेल लाइन पर चला लंबा काम
जिसके बाद रेलवे इंजीनियरों ने डाउन ट्रैक पर काम करना प्रारंभ किया और रविवार दोपहर करीब 2 बजकर 35 मिनट पर डाउन ट्रैक पर रेल का आवागमन चालू हो सका। तीसरी रेल लाइन पर इंजीनियरों की टीम ने रविवार देर शाम तक काम किया जाता रहा। डीआरएम के पीआरओ एसके श्रीवास्तव ने बताया कि जल्द ही तीसरी रेल लाइन का काम पूरा कर लिया जाएगा। अधिकतर ट्रेनों को समय से निकाला जा रहा है।
पूरी रात अव्यवस्थित रहा रेल का संचालन
वृंदावन रोड स्टेशन के निकट मालगाड़ी के डिब्बे पलटने से इंजीनियरों की टीम पूरी रात रेलवे लाइनों को चालू करने के लिए प्रयास करती रही। उनके द्वारा इस ट्रैक को 24 घंटे में चालू कर दिया जाना था।
लेकिन यह ट्रैक चालू नहीं हो सका। उधर, ट्रैक चालू होने की उम्मीद में आगरा तथा निजामुद्दीन से कई रेलगाड़ियों को इसी ट्रैक से दिल्ली भेजने के लिए ट्रेनों को भी छोड़ दिया गया। लेकिन रास्ता साफ न होने के कारण यह ट्रेनें रास्ते में ही रुकी रहीं। जिसके कारण रेलवे का आवागमन काफी अव्यवस्थित रहा।
रतलाम तक दौड़ी इंजीनियरों की जांच टीम
डीआरएम द्वारा जांच के लिए तैयार की गई चीफ ट्रैक इंजीनियर, चीफ रॉलिंग स्टाफ इंजीनियर, चीफ सिग्नल इंजीनियर, चीफ इंजीनियर रेलवे सेफ्टी की टीम ने अपना काम प्रारंभ कर दिया है। टीम द्वारा मौके पर मिले मलबे को मुख्य भाग को अतिसुरक्षित कर लिया है। जिसकी वह तकनीकी जांच करेंगे। इसके अलावा वह रतलाम डिवीजन के लिए रवाना हो गए। उनके द्वारा रतलाम पहुंचकर सीएनडब्लू विभाग द्वारा दिए गए फिटनेस प्रमाणपत्र की जांच की जाएगी। यह फिटनेस प्रमाणपत्र भी भी रेल हादसे की जांच का हिस्सा होगा। ट्रेनों का किया रूट परिवर्तित
- इंदौर-देहरादून एक्सप्रेस को एत्मादपुर, मितावली, गाजियाबाद होकर गुजारा गया।
- नागपुर-अमृतसर एक्सप्रेस को आगरा एत्मादपुर, मितावली, गाजियाबाद होकर गुजारा गया।
- चेन्नई-निजामुद्दीन गरीब रथ को आगरा एत्मादपुर, मितावली, गाजियाबाद होकर गुजारा गया।
- उत्कल एक्सप्रेस को आगरा एत्मादपुर, मितावली, गाजियाबाद होकर गुजारा गया। यह ट्रेनें रहीं लेट
- कर्नाटका एक्सप्रेस- तीन घंटे।
- सचखंड एक्सप्रेस- 4 घंटे 30 मिनट।
- नई दिल्ली-शताब्दी एक्सप्रेस- तीन घंटे।
- स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस- आठ घंटे।
- कर्नाटका एक्सप्रेस- 10 घंटे।
- पंजाब मेल एक्सप्रेस- तीन घंटे।
- मंग्रला एक्सप्रेस- चार घंटे 10 मिनट।
- ताज एक्सप्रेस- दो घंटे 20 मिनट।
- गतिमान एक्सप्रेस- एक घंटा 49 मिनट।
- तेलंगाना एक्सप्रेस- चार घंटा 20 मिनट।