बाह। इस साल सिंघाड़े की फसल बढ़िया है, बाजार में दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। सिंघाड़े की फसल में कीड़े लगने की वजह से पिछले 6 साल से बाह, जैतपुर, पिनाहट के किसानों की लागत और मेहनत डूब गई थी। अब तक नुकसान झेलने वाले किसान घाटे की भरपाई की आस के साथ मुस्करा उठे हैं। जिले भर के गांवों के एक हजार से ज्यादा तालाब में सिंघाड़े की फसल होती है, जिनमें बाह, जैतपुर, पिनाहट के करीब 150 तालाब शामिल हैं।
जरार के धर्मेन्द्र, विनोद कुमार ने बताया कि 6 साल से रोग की वजह से सिंघाड़े की फसल में नुकसान हो रहा था। इस बार फसल अच्छी है, उत्पादन बढ़ा है, बाजार में 35 से 40 रुपये प्रति किलो में बिक्री हो रही है। अच्छी कमाई और अब तक के नुकसान की भरपाई की उम्मीद है। बिजौली के रसक बिहारी, दोदापुरा के देवेन्द्र, नरहौली के गीतम ने बताया कि लगातार घाटा हो रहा था। नुकसान की भरपाई की उम्मीद में 50 हजार से एक लाख रुपये तक में भेज पर तालाब लेकर सिंघाड़े की बेल लगाई थी। तालाब में पानी भरने, बेल लगाने आदि पर 2 लाख से 2.50 लाख रुपये तक की लागत आई है। अच्छी फसल और मिल रही अच्छी कीमत से कुछ हद तक नुकसान की भरपाई हो सकती है।
अचार के लिए भी खरीदे जाते हैं सिंघाड़े
बाजार में कच्चे सिंघाड़े की बिक्री हो रही है, जिन तालाबों में सिंघाड़े पक गए हैं, उनको उबालने के बाद छिलके उतार कर बेचे जा रहे हैं। सिंघाड़े बेचने का काम करने वाले राकेश, जनवेद ने बताया कि उबले हुए सिंघाड़े 80 से 100 रुपये किलो तक बिक रहे हैं। पके हुए सिंघाड़े को गांव देहात में लोग अचार डालने में इस्तेमाल करते हैं। गृहिणी किरन, उमा, माया, संगीता ने बताया कि सिंघाड़े का अचार स्वादिष्ट और सेहत के लिए फायदेमंद रहता है।
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सेहत के लिए फायदेमंद है सिंघाड़े
सीएचसी बाह के अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि सिंघाड़े में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, कैल्सियम, आयरन, विटामिन आदि पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसलिए मौसमी फल सिंघाड़ा सेहत के लिए फायदेमंद होता है।