कवि तुलसीदास और अमीर खुसरो की जन्मस्थली व गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करने वाले कासगंज को साल 2018 ने गहरा जख्म दिया है। 26 जनवरी 2018 को तिरंगा यात्रा के दौरान शहर में भड़की हिंसा की आग में कई परिवार की खुशियां जलकर राख हो गईं।
कासगंज हिंसा में एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई और एक युवक घायल हो गया। इसके बाद भीड़ ने उग्र रूप धारण कर लिया और पूरे नगर में आगजनी की घटनाएं हुई। लाखों रुपये की संपत्ति के नुकसान के साथ ही शहर की फिजां को सामान्य होने में भी कई दिन लग गए।
26 जनवरी 2018 को कासगंज में तिरंगा यात्रा को लेकर सांप्रदायिक तनाव के बाद दंगा हो गया। तिरंगा यात्रा के दौरान दूसरे समुदाय के युवकों द्वारा चंदन गुप्ता की हत्या के बाद आक्रोश भड़क गया। हिंसा का तांडव कई दिनों तक चला। लगातार कई स्थानों पर आगजनी की घटनाएं हुईं।
हिंसा की आग में कई परिवारों की खुशी खाक
पुलिस प्रशासन को घटनाओं पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हिंसा की घटना ने तमाम परिवारों की खुशियां छीन लीं। जानमाल का नुकसान हुआ तो न जाने कितने निर्दोष भी जेल के सीखचों के पीछे पहुंच गए।
पुलिस प्रशासन और आरएएफ ने जैस तैसे इन घटनाओं पर काबू पाया, लेकिन जिले में बदअमनी का मिजाज पैदा हो गया। छोटी-छोटी बातों पर भी तनाव जैसे हालातों का कई बार सामना करना पड़ा।
कासगंज शहर की हिंसा की घटना का असर जिले के कस्बा अमांपुर में भी देखने को मिला। गंजडुंडवारा में भी तनाव के हालात बने। अमांपुर और गंजडुंडवारा में भी बिगड़ते सौहार्द को तमाम कोशिशों के बाद सही किया गया, लेकिन पूरे वर्ष पुलिस और प्रशासन इन घटनाओं से जूझता नजर आया।
15 अगस्त तक रहा असर
26 जनवरी की घटना का असर 15 अगस्त के दिन भी नजर आया। प्रशासन ने सभी तरह की यात्राओं पर पाबंदी लगा दी। 15 अगस्त के दिन भी सुरक्षा का कड़ा पहरा रहा। आरएएफ के जवानों का कड़ा पहरा शहर में रहा।
हिंसा की घटना ने ऐसे जख्म शहर को दे दिए। इससे न केवल गंगा जमुनी तहजीब प्रभावित हुई बल्कि पूरे देश में मीडिया की सुर्खियों के चलते शहर को नकारात्मक छवि का सामना करना पड़ा।