जखदर महादेव मंदिर में स्थापित शिविलिंग।
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अजीतगंज। गांव भांवत स्थित जखदर महादेव मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल से पहले का बताया जाता है। जानकारों की मानें तो पांडवों ने महाभारत युद्ध से पहले भगवान भोलेनाथ की इसी मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना की थी। विजय के बाद इसका जीर्णोद्धार कराया था।
मैनपुरी-किशनी रोड पर स्थित गांव भांवत में प्राचीन जखदर महादेव मंदिर है। इस मंदिर पर वैसे तो वर्ष भर पूजा अर्चना का कार्य चलता रहता है। सावन में यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल से भी पहले का है। ग्रामीण बताते हैं कि पांच हजार से अधिक वर्ष पूर्व लाखा बंजारा ने मंदिर का निर्माण कराया था। इस समय मंदिर में शिवलिंग के अतिरिक्त हनुमान जी, दुर्गा माता की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
ऐसा बताया जाता है कि भांवत निवासी एक ठाकुर परिवार गाय पालता था। उनकी गाय घर पर दूध नहीं देती थी, लेकिन जहां मंदिर बना है वहां पहुंचने पर गाय के थनों से स्वत: ही दूध की धार निकलने लगती थी। भांवत निवासी राकेश दुबे बताते हैं कि मंदिर का निर्माण लाखा बंजारे ने कराया था, जो ग्राम भारापुर के निवासी थे। लाखा बंजारे अपने एक लाख बैलों की गाड़ियों पर खाड़ (चीनी) लेकर जा रहे थे। मंदिर के पास शंकर जी एक बाबा के वेशभूषा में मिले। उन्होंने बंजारे से चीनी मांगी। बंजारे ने चीनी न देने के लिए यह कहकर मना कर दिया कि इसमें नमक है।
घर जाकर देखा तो सारी गाड़ियों में चीनी की जगह नमक ही था। यह देखकर बंजारे के होश उड़ गए। बाद में वह पत्नी के साथ मंदिर वाले स्थान पर पहुंचा और अपनी गलती को स्वीकार किया। शंकर जी की कृपा से नमक चीनी हो गया। बंजारे ने यहां मंदिर का निर्माण कराया।
दिवाली से लगता है मेला
जखदर महादेव मंदिर पर हर वर्ष दिवाली से शुरू होकर देवोत्थान एकादशी तक विशाल मेले का आयोजन होता है। इसमें प्रदेश भर से लोग आकर मनौती मांगते हैं।