कासगंज/एटा। बालिकाओं के लिंगानुपात में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों के अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे। जिले में लिंगानुपात 880 पर ही स्थिर बना हुआ है। हालांकि राहत की बात है कि जिले में लिंगानुपात में कमी आने से बचाया जा सका है। जानकारों के मुताबिक सुधार के लिए लोगों में जागरूकता के प्रयासों को और बढ़ाया जाना चाहिए।
शासन से कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कानून बनाया गया। इस कानून के तहत अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर लिंग परीक्षण पर रोक लगा दी गई। इसके साथ ही सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दिया। मुखबिर योजना शुरू की, लेकिन इन सबका असर अपेक्षित लोगों पर नजर नहीं आ रहा। जिला में वर्ष 2001 में कराई गई जनगणना में जिला कां लिंगानुपात 849 निकल कर आया। इसके बाद जब 2011 के दशक में जनगणना कराई गई तो जिला का लिंगानुपात बढ़कर 880 पर पहुंच गया। सीएमओ डा. प्रतिमा श्रीवास्तव के मुताबिक इसके बाद से यह आंकड़ा तकरीबन स्थिर है हालांकि इसे बढ़ाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सामाजिक प्रयासों को बढ़ाने की जरूरत है। वर्तमान में जिला में होने वाले संस्थागत प्रसव में भी लिंगानुपात लगभग 880 ही सामने आ रहा है।