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घेवर : राखी पर ब्रज की पहचान, रिश्तों में घोल रहा मिठास

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बाह: विदेशों में घुल रही भदावरी घेवर की मिठास, आज बहनें भाई का मुंह कराएंगी मीठा
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बाह। घेवर यानि मलाई, केसर और रबड़ी का जायका रक्षाबंधन के त्योहार पर भाई-बहन के रिश्ते में मिठास घोल देता है। पिस्ता, बादाम की कतरन इसका जायका और बढ़ा देती है। राखी पर ब्रज की यह मिठाई भी पहचान है। भदावरी घेवर तो विदेशों तक मिठास घोल रहा है।
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चंबल सफारी जरार के निदेशक आरपी सिंह ने बताया कि फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका, रूस , इटली, जापान, इंग्लेण्ड आदि देशों के पर्यटक यहां आकर भदावरी घेवर का जायका लिए बिना नहीं रहते। बाह में देशी घी से घेवर तैयार करने वाले बाह के राहुल पचौरी कहते हैं कि विदेशी सैलानी घेवर खाते हैं और खरीद कर अपने साथ भी ले जाते हैं। रक्षाबंधन के बाद अहमदाबाद , मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, ग्वालियर में बसे बाह के लोग भी अपने साथ भदावरी घेवर जरूर ले जाते हैं। रक्षाबंधन पर बाह, जरार, भदरौली, जैतपुर में घेवर के बाजार में खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है। घेवर खरीद रहे आनंद निर्मल, सतेंद्र सिंह, विनोद सिंह, राखी, सलौनी ने बताया कि घेवर की कुरकुरी जाली और मिठास का मेल रक्षाबंधन के त्योहार का उल्लास दोगुना कर देता है।

ऐसे तैयार होता है घेवर
पारंपरिक रूप से घेवर मैदा, घी, और ठंडे पानी के घोल से, तेज गर्म घी में तलकर और चाशनी में डुबोकर तैयार किया जाता है। मिक्सी जार में घी और बर्फ के टुकड़े डालकर तब तक फेंटे जाते हैं, जब तक वह मक्खन जैसा मलाईदार न हो जाए। इसमें थोड़ा-थोड़ा करके मैदा, बेसन, दूध और ठंडा पानी मिलाते हैं। एकदम पतला और चिकना घोल तैयार होने पर नींबू रस मिलाते हैं। एक गहरे बर्तन में घी को गर्म करते हैं। पतली धार के साथ घोल को ऊंचाई से पतीली में डालते हैं। तलने के बाद चीनी की चाशनी बनाकर इसे घेवर के ऊपर समान रूप से डालते हैं।
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