देश की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस ने अपने नियमित संचालन के दूसरे ही दिन कीर्तिमान बना डाला। भले वह दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन से आगरा कैंट 98 मिनट (अधिकारियों के अनुसार राउंड फीगर में 100 मिनट) में पहुंची हो पर राजा की मंडी तक वह 90 मिनट में ही आ गई। यहां तक आने में पहले दिन के मुकाबले इसने बुधवार को करीब 5 मिनट का सुधार किया। यानी वह कैंट तक इतने ही समय में पहुंच सकेगी, यह उम्मीद बढ़ी है। बता दें, यही समय तय करके ट्रायल शुरू हुए थे। बाद में ट्रैक की दिक्कतों के चलते 100 मिनट को ही निर्धारित अवधि स्वीकार कर लिया गया।
गतिमान एक्सप्रेस बुधवार को दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से सुबह 8:10 बजे रवाना हुई। ट्रेन 160 किमी प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार से होडल पर 8:51 बजे, छाता पर 9:00 बजे, वृंदावन 9:08 बजे, फरह 9:25 बजे, रुनकता 9:33 बजे, राजा की मंडी पर 9:40 बजे पहुंच गई। भले यहां स्टापेज न हो लेकिन यह आगरा शहर के बीचोबीच स्थित स्टेशन है। बता दें, राजा की मंडी पर रफ्तार कम करना विवशता भी है। यहां दो धर्मस्थलों के कारण ट्रैक को अर्धचंद्राकर घुमाकर निकाला गया है। इसी कारण कैंट पर ट्रेन 98 मिनट में पहुंची, मगर आधिकारिक तौर पर यह समय 100 मिनट ही बताया गया।
ट्रेन की राह में कोई हादसा न गुजरे, इसके लिए बुधवार को भी पूरे रास्ते पहले दिन जैसी ही सावधानी बरती गई। आरपीएफ-जीआरपी के जवान और रेलकर्मियों की ड्यूटी ट्रैक पर लगाई गई। गतिमान के आने-जाने से पहले वह ट्रैक पर यहां-वहां ट्रैक पार कर रहे लोगों को रोकते रहे। यात्रियों ने ट्रेन की सर्विसेज की सराहना की। ज्यादातर यात्री आगरा भ्रमण करने के लिए आए थे।
आगरा से जाने वाले ज्यादा
निजामुद्दीन से गतिमान में 33 यात्री एग्जीक्यूटिव चेयरकार और 216 यात्री एसी चेयरकार में आए। शाम को आगरा कैंट से एसी चेयरकार में 240 यात्री और एग्जीक्यूटिव में 33 यात्री दिल्ली रवाना हुए।
गतिमान के लिए रोकीं कई गाड़ियां
गतिमान को पास कराने के लिए दूसरे भी दिन भी कई गाड़ियों को रोका गया। रेलवे के सूत्रों के मुताबिक, इनमें सुपर फास्ट ताज एक्सप्रेस, कई मेल और गुड्स ट्रेनें भी शामिल थीं। गतिमान एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा असर गुड्स ट्रेनों पर पड़ा है।
दूसरे ही दिन उपेक्षा आरंभ
गतिमान, जिसकी मंगलवार को खूब आवभगत हुई बुधवार को आगरा कैंट स्टेशन के प्लेटफार्म छह पर सामान्य ट्रेन की तरह खड़ी कर दी गई। यहीं से शाम दिल्ली के लिए वापसी हुई। लगभग आठ घंटे यहीं खड़ी रही इस अतिविशिष्ट ट्रेन में खुराफातें रोकने की कोई फिक्र न की गई। इंटरकनेक्टेड ट्रेन में कोई घुसकर कहीं भी जा सकता था। नए कोच को कोई खरोंच न जाए इसकी तक निगरानी न थी। क्योंकि पार्सल की ट्रालियां ही नहीं साइकिल सवार लोग तक खड़ी ट्रेन के काफी करीब से गुजरते रहे। आरपीएफ हो या जीआरपी, उन्हें दूर करने की जहमत नहीं उठाई।
ट्रेन होस्टेस भटकने को मजबूर
रेलवे ने स्पेशल ट्रेन में यात्रियों की सेवा के लिए 30 मेल-फीमेल ट्रेन होस्टेस तैनात किए हैं। बुधवार को ट्रेन में इनकी सेवा का दूसरा दिन था। इसके बाद भी उनके ठहरने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। वे आठ घंटे तक प्लेटफार्म या फिर ट्रेन में ही बैठे रहते हैं। होस्टेस का कहना है कि एक दो दिन में इंतजाम हो जाएगा। बता दें, ट्रेन में सेवाएं दे रहे होस्टेस रेल कर्मचारी नहीं हैं।