फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Agra News: गैस सिलिंडर की किल्लत से बढ़ी परेशानी, परिवार लौटे लकड़ी-कोयले के चूल्हे पर, चूल्हे के धुएं में बीत रहा परिवारों का वक्त, बिजली भी नहीं दे रही राहत, दैनिक दिनचर्या बाधित

विज्ञापन
विज्ञापन
आगरा। देश के कई हिस्सों में गैस सिलिंडर की भारी किल्लत ने आम परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रसोई गैस (एलपीजी) की भारी किल्लत ने आम आदमी की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है। सिलिंडर के लिए मची मारामारी के बीच अब कई परिवारों ने मजबूरी में पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। वहीं, बिजली से खाना बनाना भी महंगा साबित हो रहा है, जिससे लोगों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। फिलहाल, राहत के कोई ठोस संकेत नहीं दिख रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर होने की आशंका है।
विज्ञापन

आँगन या छतों पर ईंटों के बनाए अस्थायी चूल्हे
शहर से लेकर गांवों तक, लोग एक बार फिर लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं। उज्जवला सिलिंडर न मिलने से गृहिणियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं, लेकिन स्टॉक खत्म होने से लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। गैस सिलिंडर के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची और आपूर्ति में देरी ने उनकी दैनिक दिनचर्या को बाधित कर दिया है। मजबूरन, लोगों ने घर के आँगन या छतों पर ईंटों के अस्थायी चूल्हे बना लिए हैं। ईंधन के लिए लकड़ी और कोयला जुटाने में भी लोगों का समय जाया हाे रहा है। एक गृहणी का तो यहां तक कहना है कि एक दिन में तीन से चार बार चाय बनानी होती है। दिन की तपिश में चूल्हे पर खाना बनाना दुभर है। लेकिन रात की बेला में थोड़ा राहत है। जबकि धुएं की वजह से आंखों में जलन और सांस की समस्याओं से जूझना पड़ता है।
बिजली के उपकरण भी हुए बेअसर
एलपीजी सिलिंडर के विकल्प के रूप में लोग हीटर, इंडक्शन और इलेक्ट्रिक चूल्हों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन बिजली की बढ़ती दरों और अघोषित कटौती ने इस विकल्प को भी महंगा और अनिश्चित बना दिया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि महीने भर बिजली पर खाना बनाने से बिल दोगुना आने का डर है, वहीं बार-बार जाती बिजली के कारण खाना बीच में ही अधूरा रह जाता है।
विज्ञापन


लकड़ी-कोयले के दामों में भी उछाल
जैसे ही गैस की किल्लत बढ़ी, बाजार में सूखी लकड़ी और कोयले की मांग में अचानक तेजी आ गई है। इसका फायदा उठाकर विक्रेताओं ने इनके दाम भी बढ़ा दिए हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि एक तरफ महंगाई की मार है और दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं का अभाव, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन से जल्द समाधान की मांग स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और गैस कंपनियों से आपूर्ति बहाल करने की गुहार लगाई है।

होटलों और सहायतार्थ भोजन पर भी पड़ा असर
कई होटल के मालिक और ठेल पर खाना बेचने वाले भी पेरशान हैं। उनका कहना है कि अब तो ब्लैक में भी सिलिंडर नहीं मिल रहे है। पहले 1500-2200 रुपये तक में सिलिंडर मिल जाते थे। वहीं, गरीब तबके के लोगों को सहायतार्थ भोजन उपलब्ध करने वाली कई संस्थाओं ने भी अपने चूल्हे बंद कर दिए हैं। सिकंदरा चाैराहे पर पंडित जी पूरी वाले की दुकान पर 10 रुपये में मिलने वाला भरपेट भोजन (10 रुपये में 6 पूरी, सब्जी, रायता, मिर्च का अचार व पेठा) की जगह बृहस्पतिवार को 12 रुपये में तीन पूरी और सब्जी मिली। यहां 10 रुपये में भरपेट भोजन दिन के 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक ओसवाल बुक फाउंडेशन की ओर से सहायतार्थ मुहैया कराई जाती है। एलपीजी सिलिंडर की स्थिति ऐसी ही रही तो गुरुद्वारे, मंदिरों और धर्मशालाओं में चलने वाले निशुल्क लंगर पर भी असर पड़ सकता है। रिपोर्ट : सचिन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें