ग्रीन गैस के बिल और कनेक्शन अपडेट के नाम पर साइबर अपराधियों ने दो लोगों के खातों से 11.52 लाख रुपये उड़ा दिए। पुलिस आयुक्त ने लोगों को संदिग्ध लिंक और एपीके फाइल डाउनलोड न करने की सलाह देते हुए 1930 पर तत्काल शिकायत करने की अपील की है।
साइबर अपराधी लोगों की ठगने के लिए ग्रीन गैस के बिल का सहारा ले रहे हैं। ग्राहकों का डाटा उनके पास है। व्यस्तता के समय साइबर ठग कॉल करते हैं और मीटर अपडेट करने, सीआरएन नंबर देखने, बिल बकाया या कनेक्शन काटने का डर दिखाकर एपीके फाइल डाउनलोड करवा खाता खाली कर रहे हैं। सोमवार को भी साइबर क्राइम थाने में दो मामले आए। प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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पुलिस आयुक्त ने एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों से जागरूक रहने की अपील की है। कहा कि साइबर अपराधी संदिग्ध नंबरों से कॉल या व्हाट्सएप कर एपीके फाइल अथवा लिंक भेजकर उसे इंस्टॉल कराते हैं। इससे मोबाइल की निजी जानकारी के साथ बैंक की डिटेल भी उनके हाथ लग सकती है।
बैंक खाता और अन्य कार्ड संबंधी जानकारी साझा न करें और एनी डेस्क जैसे रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल करने से बचें। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल कर साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें। जितनी जल्दी सूचना मिलेगी, रकम रोकने या रिकवर होने की संभावना उतनी अधिक होगी।
केस -1
ताजगंज क्षेत्र के पुरानी मंडी निवासी अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर ग्रीन गैस का सीआरएन नंबर देखने के लिए एपीके फाइल भेजी। फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक हो गया और बैंक खाते से कई बार में 6,14,458 रुपये ट्रांसफर हो गए। 10 और 11 सितंबर को उनके बैंक खाते से रकम निकाली गई।
केस -2
शाहगंज क्षेत्र के पुष्पनगर निवासी प्रभाकर साइबर ठगी का शिकार हो गए। उन्होंने बताया कि 11 सितंबर को एक अज्ञात नंबर से उन्हें कॉल आई। कॉल करने वाले ने ग्रीन गैस मीटर अपडेट करने के नाम पर उनके मोबाइल में मीटर अपडेट नाम का एप डाउनलोड कराया। इसके बाद उनके बैंक ऑफ इंडिया के बचत खाते से 5,37,781 रुपये ट्रांसफर कर लिए। उन्हें शाम को करीब 5:30 से 6:30 बजे के बीच जानकारी हुई। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने ये कहा
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि यदि कोई फोन कर बिजली या गैस कनेक्शन काटने की धमकी दे तो उसके दबाव में न आएं। न ही कोई भुगतान करें या कोई एप डाउनलोड करें। पहले अधिकृत माध्यम से बिल की पुष्टि करें। अन्यथा ठगी के शिकार हो सकते हैं। शिकायतों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।