फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुली पोल: न घरों से उठा कूड़ा न सड़कों पर सफाई, फिसड्डी रहने की पांच वजह सामने आईं

Fri, 22 May 2020 11:21 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • 9.5 फीसदी घरों से ही उठा कूड़ा
  • 3.25 लाख घरों को डस्टबिन नहीं बांटे
विज्ञापन
आगरा नगर निगम
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शहरी विकास मंत्रालय की गार्बेज फ्री सिटी की रेटिंग में आगरा नगर निगम को कोई स्टार नहीं मिला है। अफसरों का दावा था कि फाइव स्टार रेटिंग मिलेगी। इसके बावजूद स्थिति खराब होने की पांच वजह सामने आईं हैं। इनमें सबसे प्रमुख घरों से कूड़ा न उठना है। दूसरी सड़कों पर सफाई न होना है।
विज्ञापन


बेहतर सफाई करने वाले छोटे शहरों अलीगढ़, गजरौला, झांसी को एक स्टार दिया गया, जबकि आगरा को मायूस होना पड़ा। टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य इंजीनियर उमेश शर्मा और केशो मेहरा का कहना है कि रेटिंग के लिए सफाई व्यवस्था पर हर स्तर पर काम किया जाना चाहिए था। उन्होंने पांच कमियां बताई हैं।

9.5 फीसदी घरों से ही उठा कूड़ा
नगर निगम की डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना फेल हो गई। जनवरी में चारों कंपनियों का करार निरस्त करना पड़ा शहर में 92 फीसदी घरों से कूड़ा कलेक्शन का दावा किया गया था, लेकिन जब सत्यापन किया गया तो महल 9.5 फीसदी घरों से ही कूड़ा इकट्ठा करना पाया गया।
विज्ञापन

कूड़ा अलग-अलग नहीं किया
निगम ने 14 करोड़ के डस्टबिन कूड़े को अलग-अलग इकट्ठे करने के लिए खरीदे, पर बांटे नहीं। 3.25 लाख घरों को डस्टबिन नहीं बांटे जा सके। सूखा कचरा, गीला कचरा और संक्रमित कचरा अलग-अलग करने की व्यवस्था में प्रतिशत के मुताबिक अंक थे, जो निगम ले नहीं पाया। 25 प्रतिशत पर एक स्टार रेटिंग मिलनी थी।

सार्वजनिक जगहों पर सफाई
गार्बेज फ्री सिटी में लोगों के फीडबैक का बड़ा महत्व रहा। सार्वजनिक जगहों पर सफाई के स्तर पर जब फीडबैक लिया गया तो लोगों ने स्पष्ट कहा कि सड़कों पर सफाई होती नहीं। नालियों से सिल्ट निकाली नहीं जाती। थर्ड पार्टी फीडबैक के कारण रेटिंग नहीं दी गई। टीम को शहर की सड़कों पर कचरा बिखरा हुआ मिला।

सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग में फेल
सूखे और गीले कचरे के प्रोसेसिंग में भी नगर निगम को अंक नहीं मिल पाए। दरअसल गीले कचरे से खाद बनाने और सूखे कचरे को एमआरएफ के लिए जितनी पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए थी, नगर निगम सिर्फ कागजों में ही उसे तैयार कर रहा है। इसके अलावा डस्टबिन से कूड़े का उठान और छोटे डस्टबिन टूटे होने के कारण टीम ने आगरा को स्टार कैटेगरी लायक समझा ही नहीं।
 

बल्क वेस्ट जेनरेटर पर दिखावे की कार्रवाई
नगर निगम ने शहर में ढाई हजार से ज्यादा बल्क वेस्ट जेनरेटर की लिस्ट तो बनाई है और कागजों पर जुर्माना भी ठोका, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। एक साल में किसी भी बल्क वेस्ट जेनरेटर से नगर निगम ने जुर्माना नहीं वसूला। जो कार्रवाई दिखाई गई, असलियत उससे काफी दूर थी। इसमें भी निगम को रेटिंग नहीं मिल पाई।

हमारे कई काम नजीर थे: नगर आयुक्त
नगर निगम ने जो काम किए थे, उसके मुताबिक हमने फाइव स्टार रेटिंग का दावा किया था। प्रदेश सरकार की ओर से भी हमें 3 स्टार रेटिंग के लिए सिफारिश की गई थी, लेकिन पता नहीं क्यों हमें रेटिंग की लिस्ट से दूर रखा गया। आगरा में सफाई के कई काम नजीर थे। रेटिंग न मिल पाने से निराश नहीं है। स्वच्छ भारत की रेटिंग में हमें बेहतर स्थान मिलेगा ऐसी उम्मीद है। -अरुण प्रकाश नगर आयुक्त

निगम बुनियादी जिम्मेदारी भी पूरी नहीं कर रहा

डोर टू डोर, कूड़े को अलग-अलग रखना, सफाई करना, नालों की सफाई करना, प्लास्टिक पर प्रतिबंध यह सभी मानक ऐसे हैं जिन्हें पूरा करना नगर निगम की बुनियादी जिम्मेदारी है। नगर निगम के अधिकारी इन छोटे काम में भी फेल हैं। इस तरह की रेटिंग मिलने से जो कर्मचारी अच्छा काम कर रहे हैं उन्हें प्रोत्साहन मिलता। -केशो मेहरा, सदस्य, टीटीजेड अथॉरिटी
विज्ञापन

अधिकारियों में इच्छाशक्ति की कमी
हेरिटेज सिटी का दावा कर रहे आगरा को गार्बेज फ्री सिटी के रूप में स्टार रेटिंग मिलनी ही चाहिए थी, लेकिन अधिकारियों की इच्छाशक्ति की कमी है जिस वजह से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में दिक्कतें आ रही हैं। सख्ती के साथ शहर में सफाई की व्यवस्था और डिजिटल मॉनीटरिंग होनी चाहिए। इसमें स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से मदद ले सकते हैं।  -इंजीनियर उमेश शर्मा, सदस्य टीटीजेड अथॉरिटी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें