कासगंज। खादर की जमीन में फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद गन्ना विभाग ने जांच को टीमें गठित कर दी हैं। विभाग की ओर से विकासखंड स्तर पर जांच शुरू कराई गई है। गन्ना माफियाओं का चिह्नित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है। खादर की जमीन की जांच पूरी होने के बाद ही शासन स्तर से चीनी मिल के लिए गन्ने का लक्ष्य आवंटित किया जाएगा।
जिला गन्ना अधिकारी ने खादर की जमीन की भूलेखों से जांच की तो बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। गन्ना अधिकारी ने बिना भूलेखों के पंजीकरण कराने वाले किसानों को काली सूची में डालते हुए बढ़े क्षेत्रफल की गन्ना खरीद निरस्त कर दी है। उसके बाद बारीकी से जांच के लिए ब्लॉक स्तर पर टीमें भी बना दी हैं। एक सप्ताह में इन टीमों से रिपोर्ट मांगी गई है। टीमें किसानों द्वारा पंजीकरण कराई गई भूमि के भूलेखों की जांच करेंगी। यदि भूलेख और पंजीकरण के कृषि भूमि संख्या सही पाए जाते हैं तब ही किसानों का पंजीकरण वैध माना जाएगा। अन्यथा पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। जिला स्तर से जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उसके बाद गन्ना आयुक्त कार्यालय से न्यौली चीनी मिल के लिए गन्ना खरीद का लक्ष्य आवंटित होगा।
बिचौलियों में खलबली
कासगंज। जिले में तमाम किसान ऐसे पाए गए हैं जिनके पंजीकरण तो गन्ना समिति में थे, लेकिन उनके खेत में गन्ने के स्थान पर अन्य फसलें पैदा हो रही हैं। इन किसानों को गन्ना विभाग ने बिचौलियों की श्रेणी में शामिल किया है। जांच शुरू होते ही बिचौलियों में खलबली मच गई है।
- 80 लाख क्विंटल गन्ना पिछले पेराई सत्र में चीनी मिल के लिए हुआ था आवंटित।
- 16 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद कर सकी थी चीनी मिल।
- जिले में गन्ना खरीद में फर्जीवाड़ा करने वालों का चिह्निकरण हो चुका है। फिर भी विभागीय स्तर से जांच करा रहे हैं। गन्ना खरीद में माफियाओं को सक्रिय नहीं होने दिया जाएगा- ओमप्रकाश यादव, जिला गन्ना अधिकारी।