कासगंज। जैव विविधता के लिए वन विभाग ने एक और नई पहल की है। अब बूढ़ी गंगा के जीर्णोद्धार के बाद यहां पानी की धार को अविरल करने के लिए फेज 2 की कार्ययोजना बना ली है। गंगानदी और नहरों में कछुओं के संरक्षण की भी तैयारी की गई है। पूरी योजना तैयार कर भारत सरकार को भेजी। अब भारत सरकार की टीम जिले में पहुंचेगी। वन विभाग अपनी तैयारियों का प्रस्तुतिकरण देगा।
बूढ़ी गंगा नदी का पिछले साल जिला प्रशासन ने जीर्णोद्धार कराया था। यहां पर्यावरण और जलसंरक्षण के लिए तमाम संभावनाएं तलाशी गईं। उसके बाद डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड) को वन विभाग ने रिपोर्ट भेजी। डीएम सीपी सिंह ने भी शासन को अपनी पूरी कार्ययोजना भेजी। अब भारत सरकार की संस्था डब्ल्यू डब्ल्यू एफ ने जैव विविधता के मद्देनजर सहयोग की तैयारी की है।
यहां डब्ल्यू डब्ल्यू एफ की टीम बूढ़ी गंगा, आद्र क्षेत्र संरक्षण, हरिपदी कुंड के संरक्षण को पहुंचेगी। इसके अलावा गंगाघाटों में निवास करने वाले सरीसृपों के संरक्षण को भी पहल करेगी। यहां कछुुओं के संरक्षण पर डब्ल्यू डब्ल्यू एफ की टीम का विशेष बल रहेगा। पर्यावरण और कछुओं के संरक्षण की कार्ययोजना वन विभाग ने तैयार की है।
योजना है कि गंगा नदी के किनारे जो एक बड़े क्षेत्रफल में रेतीली भूमि है वहां कछुओं के घरौंदे बनाए जाएंगे और फिर वहां प्रजनन कराकर कछुओं की आबादी बढ़ाई जाएगी। अब तक वन विभाग ने जो सर्वे किया है उसमें पाया गया है कि गंगानदी और नहरों में कछुओं की संख्या अधिक है।
इस तरह होगा संरक्षण
- गंगानदी में कछुओं के प्राकृतिक रहवास के साथ ही वन विभाग अस्थायी घरौंदे बनाएगा।
- किसी भी वन्य जीव बिक्री केंद्र पर कछुओं की बिक्री नहीं होने दी जाएगी।
- कछुओं की प्रजाति को बढ़ावा देने के लिए प्रजनन कराकर उन्हें आद्र क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा।
- किसानों को जागरूक कर कछुआ संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
10 सितंबर को बैठक में होगा प्रस्तुतिकरण
भारत सरकार की संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम 10 सितंबर को कासगंज पहुंचेगी। यहां शाम 4:30 बजे से कलक्ट्रेट सभागार में बैठक होगी। इसमें टीम के सीनियर कॉर्डिनेटर राजेश कुमार वाजपेयी के नेतृत्व में वन विभाग प्रस्तुतिकरण करेगा। इसमें जिला गंगा की कार्ययोजना, बूढ़ी गंगा के पुनरुद्धार, हरिपदी गंगा, रामछितौनी और दरियागवंज झील के अलावा कछुआ संरक्षण परियोजना का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।
- बूढ़ी गंगा के जीर्णोद्धार और कछुओं के संरक्षण पर विशेष बल है। भारत सरकार की टीम ने प्रस्तुतिकरण देखने के लिए समय दे दिया है। टीम 10 सितंबर को आ रही है। पूरी तैयारी कर ली गई है। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।