योगेश से पुलिस ने लूटी गई रकम और डंडा बरामद किया था। उसे जेल की सर्किल नंबर एक के आठ नंबर अहाते में बैरकों को बंद करने की प्रक्रिया चल रही थी। अहाते में दो मंजिला नई बैरक बनी है। पहली मंजिल से छत पर जाने वाली सीढ़ियों के बंद दरवाजे के कुंडे पर योगेश का शव फांसी पर लटका था। योगेश ने फंदा कसने के बाद पैर सीढ़ियों की तरफ लटका दिए थे, जिससे फांसी लग गई। जेलर संजीव सिंह ने बताया कि फोरेंसिक टीम से जांच कराई गई। पुलिस अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। घटना के कारणों की जांच कराई जा रही है।
कहां थे जेल के कर्मचारी
बंदी ने दो मंजिला बैरक की सीढ़ियों पर जाकर दरवाजे से फंदा कस लिया। इसकी भनक न बंदियों को सकी और न ही कर्मचारियों को, जबकि जेल को बंद करने से पहले बैरक में बंदियों की गिनती होती है। नंबरदार और बंदीरक्षक भी सर्किल में राउंड पर रहते हैं। इसके बावजूद बंदी के आत्महत्या करने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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