आगरा में 1800-2000 तक सार्वजनिक पंडाल लगाए गए। इसके अतिरिक्त घरों में गणेश प्रतिमा को स्थापित किया गया था। एक अनुमान के मुताबिक रविवार को करीब 4000-5000 प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। हाथी घाट पर दोपहर करीब 2:30 बजे तक करीब 450 प्रतिमाओं का पंजीकरण हो चुका था। इसके अतिरिक्त तमाम प्रतिमाएं बिना पंजीकरण कराए ही विसर्जित की गईं।
बल्केश्वर घाट, दशहरा घाट, कैलाश घाट, रेणुका धाम घाट पर भी बड़ी संख्या में विसर्जन हुए। कुंडों में प्रतिमाओं के लिए स्थान तक नहीं बचा था। देर शाम तक विसर्जन की प्रक्रिया चलती रही। भीड़ को संभालने में पुलिस को बड़ी मशक्कत करनी पड़ी। एडीएम सिटी केपी सिंह और एसपी सिटी ने सभी कुंडों का भ्रमण किया।
यमुना किनारा सहित कई मार्गों पर जाम
गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूसों के चलते शहर में कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था बाधित हो गई। हालांकि रविवार का दिन होने के चलते स्कूल, कॉलेज और कार्यालय बंद रहे अन्यथा स्थिति और खराब हो जाती। सबसे अधिक परेशानी यमुना किनारा रोड पर हुई। हाथी घाट पर आने वाले जुलूसों की वजह से यहां जाम के हालात रहे। पार्किंग व्यवस्था न होने से श्रद्धालुओं के वाहन सड़क पर ही खड़े हुए।
जाम में तमाम पर्यटक वाहन फंस गए। कैलाश मोड़ से कैलाश मंदिर तक जाम के हालात रहे। मंदिर तक पहुंचने के पांच मिनट के रास्ते को तय करने में तीन-तीन घंटे तक लगे। बल्केश्वर कालोनी में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दशहरा घाट की ओर जा रहे गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस विदेशी पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय रहे। गाइडों ने उन्हें इसके बारे में समझाया। कई विदेशी पर्यटक जुलूस में शामिल भी हुए और झूमकर नाचे।
प्रतिबंध के बावजूद यमुना में विसर्जन
नदियों में प्रतिमा और पूजन सामग्री के विसर्जन पर प्रतिबंध है। इसीलिए अस्थायी कुंड बनाए गए हैं। लेकिन रविवार को बड़ी संख्या में लोगों ने यमुना नदी में विसर्जन किया। ककरैठा, पोइया घाट, दयालबाग, समोगर, इनर रिंग रोड की ओर से लोगों ने प्रतिमाओं को नदी में विसर्जित किया।