‘...अगले बरस तू जल्दी आना’, ‘अगले बरस तुमको आना ही होगा...।’ ऐसी कामना के साथ अनंत चतुर्दश पर गणपति को श्रद्धालुओं ने विदा किया। गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा स्थापित करने के बाद लोग गजानन की सेवा में लगे थे। विदाई के वक्त भक्त भावुक नजर आए। धूमधाम से विसर्जन यात्रा निकाली गई। मनोहरपुर, हाथी घाट और कैलाश घाट पर पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। कोई गणपति को गोदी में उठाए, सिर और कंधे पर बैठाए नजर आया। प्रशासन की ओर से बनाए गए कुंडों प्रतिमा विसर्जित की गई।
सुबह से शाम तक शहर के प्रत्येक बाजार, गल्ली-मोहल्ले और यमुना जी के घाटों का नजारा देखने लायक था। ‘गणपति बप्पा मोरया, ‘जय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ति’, ‘एक, दो, तीन, चार गणपति की जय जयकार’ की गूंज सुनाई दे रही थी। श्रद्धालु झूमते-नाचते हुए झुंड के झुंड गणपति को विदाई करने निकल रहे थे। उनका उत्साह देखने लायक था। लोग अबीर-गुलाल उड़ाते और बैंड-लाउडस्पीकर बज रहे गीतों पर नृत्य कर रहे थे। मनोहरपुर, हाथीघाट, बल्केश्वर महादेव, रेणुका धाम घाटों पर दिन भर गणेश भक्तों की भीड़ लगी रही। श्रद्धालु घरों, गली-मुहल्लों और मंदिरों में स्थापित गणेश जी की छोटी-बड़ी मूर्तियों के साथ घाटों पर पहुंच रहे थे। ठेला, बैलगाड़ी, ट्रैक्टर, टेंपो, डीसीएम और ट्रकों से बाजेगाजे के साथ गणेश जी को विदा करने पहुंचे।
कमला नगर-बल्केश्वर राजा की विशाल प्रतिमा को क्रेन से रथ पर विराजमान किया गया। तोप से पुष्प वर्षा की जा रही थी। गोकुलपुरा स्थित श्री सिद्ध विनायक गणेश मंदिर में स्थापित प्रतिमा को शाम साढ़े बजे विसर्जन के लिए कैलाश घाट ले जाया गया। इससे पूर्व 1100 दीपकों से महाआरती की गई। इसमें विधायक योगेंद्र उपाध्याय शामिल हुए।
सेवाभाव की दिखी झांकी
आगरा। विसर्जन यात्रा में शामिल लोगों की सेवा के लिए लोगों ने तमाम इंतजाम किए। यात्रा मार्ग में शीतल जल, शर्बत की प्याऊ लगाई और भंडारे का आयोजन किया गया। वहीं कुछ लोग पानी का पाउच, बिस्कुट बांटते भी दिखे।
कुंड में ही कराया विसर्जन
हाथीघाट, कैलाश घाट, मनोहर पुर में प्रशासन की ओर से प्रतिमा विसर्जन के लिए कुंड बनाए गए थे। पुलिस ने किसी को नदी की ओर नहीं जाने दिया। मनोहरपुर घाट पर एक ट्रैक्टर खड़ा था, उसमें माला-फूल, पालीथिन आदि को भरा जा रहा था।
मंदिर प्रांगण में ही विसर्जन
आगरा। श्री सनातन धर्म मंदिर, शहजादी मंडी में स्थापित की गई गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा को मंदिर प्रांगण में बनाए गए कुंड में विसर्जित किया गया। इस पहल से लोगों को यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने का संदेश दिया गया। बैजनाथ शर्मा, ललित कुकरेजा, राजन लाल गुप्ता, वासुदेव प्रसाद मित्तल, हेमंत सलूजा आदि मौजूद रहे। ताजनगरी फेस दो स्थित पार्श्वनाथ पंचवटी में पंडाल में ही कुंड बनाकर गणपति को विदा किया गया। इसके बाद उस जल को लोगों ने अपने घरों में छिड़का। वहीं, बटेश्वर में यमुना किराने बनाए गए कुंड में गंदा पानी देख श्रद्धालु गणपति प्रतिमाओं को लौटा ले गए। घर पर ड्रमों में साफ पानी भरकर प्रतिमाओं का विसर्जन किया। जरार के रामनरेश, भदरौली के उमाशंकर, बाह के हाकिम सिंह आदि का कहना था कि अब वे इस मिट्टी युक्त पानी को खेतों में डालेंगे।