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देश और समाजहित में परिवार को भी भूले गांधी जी

Mon, 29 Feb 2016 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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ताज लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण में रविवार को गांधी टुडे पुस्तक के लेखक प्रमोद कपूर ने जाने माने पत्रकार पुष्पेश पंत और फीरोज अब्बास के साथ चर्चा की। प्रमोद ने बताया कि गांधीजी ने देश और समाज के हित के लिए अपने परिवार की कभी चिंता नहीं की। गांधीजी के पुत्र हरिलाल शराबी हो गए। बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया। हरिलाल की जिंदगी गुमनामी के अंधेरे में कटी।
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प्रमोद ने बताया कि गांधीजी के कस्तूरबा गांधी से संबंधों का जिक्र किताब में किया गया है। उन्होंने गांधीजी के साउथ अफ्रीका की जेल में रहने के दौरान कस्तूरबा को लिखे पत्र की पंक्तियां पढ़कर सुनाईं। कस्तूरबा के बीमार होने की जानकारी मिलने पर गांधीजी ने उन्हें पत्र में लिखा कि तुम्हारी बीमारी के बारे में पता चला, मगर मैं देखभाल करने नहीं आ सकता हूं। तुम अपना ख्याल रखना। अगर जेल में सत्याग्रह आंदोलन के दौरान मैं मर भी जाऊं तो परेशान मत होना। अगर बीमारी से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी तो मैं दोबारा शादी नहीं करूंगा। तुम्हारी मृत्यु भी बलिदान मानी जाएगी।
गांधीजी पर डाक्यूमेंट्री बनाने वाले फीरोज अब्बास ने गांधीजी और उनके बड़े पुत्र हरिलाल के संबंधों पर चर्चा की। गांधी जी के साथ रहने के बावजूद वह शराब के आदि हो गए। गांधीजी देश की सेवा में लगे होने के कारण ध्यान भी नहीं दे पाए। अंत में हरिलाल ने इस्लाम धर्म अपना लिया। शराब के साथ ही वे मुंबई में रेड लाइट एरिया में घूमते थे। अत्यधिक शराब के सेवन से ही मुंबई के अस्पताल में गुमनामी के अंधेरे में उनकी मौत हो गई। फीरोज ने बताया कि हरिलाल गांधीजी की मृत्यु होने पर उनके अंतिम संस्कार में भी नहीं पहुंचेे थे। पुष्पेश पंत ने बताया कि गांधीजी के विचार हर पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी हैं। बात केवल उन्हें ग्रहण करने और नहीं करने की है।
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