परिवार का बन रहे सहारा
केंद्रीय कारागार में वैसे तो कई उद्योग संचालित हो रहे हैं। मगर, उनमें से फर्नीचर उद्योग काफी महत्वपूर्ण है। इससे जुड़े बंदियों को जहां अपना हुनर दिखाने का मौका मिल रहा है, वहीं अपने परिवार का भी सहारा बन रहे हैं। उनके कार्य करने के हिसाब से हर महीने चार से छह हजार रुपये तक की कमाई हो रही है। इसे बंदियों के खाते में जमा करा दिया जाता है, जिससे उनके परिवार उपभोग कर सकें।
वर्ष 2012 से संचालित हो रहा फर्नीचर उद्योग
जेल के वरिष्ठ अधीक्षक के मुताबिक, फर्नीचर उद्योग वर्ष 2012 से संचालित है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, सहारनपुर, झांसी, फिरोजाबाद, एटा, अलीगढ़ जिलों की अदालतों से आर्डर मिलने पर माल तैयार करके भेजा जाता है। फर्नीचर का रेट निर्धारित है। लकड़ी बाजार से खरीदी जाती है।