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जलभराव के बीच निकली अर्थी: 10 मिनट की बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, हाईवे पर एक फुट तक भरा पानी, लोगों में गुस्सा

Thu, 16 Jul 2026 09:52 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा-हाथरस राष्ट्रीय राजमार्ग पर महज 10 मिनट की बारिश के बाद हुए जलभराव के बीच 80 वर्षीय समाजसेवी जयप्रकाश शर्मा की अंतिम यात्रा निकालनी पड़ी। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जल निकासी की समस्या बरकरार रहने से लोगों में आक्रोश है।
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जलभराव के बीच निकली अर्थी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा-हाथरस राष्ट्रीय राजमार्ग पर जल निकासी के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। बुधवार सुबह महज 10 मिनट की बारिश ने एक बार फिर निर्माण कार्य और जिम्मेदारों के दावों की पोल खोल दी। लाल मंदिर से माया वाटिका तक हाईवे पर करीब एक फुट पानी में डूब गया। इसी जलभराव के बीच रामनगर निवासी 80 वर्षीय समाजसेवी एवं अधिवक्ता जयप्रकाश शर्मा की अंतिम यात्रा निकली। मंगलवार देर रात बीमारी के चलते उनका निधन हो गया था।
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बुधवार सुबह अंतिम संस्कार के लिए जब परिजन और सैकड़ों ग्रामीण अर्थी लेकर निकले तो उन्हें जलभराव से होकर गुजरना पड़ा। यह मार्मिक दृश्य देखकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए, लेकिन हाईवे पर भरे पानी के कारण सभी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे किनारे बनने वाले नाले पर कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।

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प्रशासन नाले का निकास घड़ी रायसिंह स्थित धंगेटा नहर बंबा तक करना चाहता है, लेकिन विरोध के चलते निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। नतीजतन हर बारिश में राष्ट्रीय राजमार्ग तालाब बन जाता है और राहगीरों के साथ स्थानीय लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रतिदिन करीब आधा दर्जन जनप्रतिनिधियों का आवागमन होता है, लेकिन किसी ने भी वर्षों से चली आ रही इस समस्या के स्थायी समाधान की गंभीर पहल नहीं की।

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दूसरी ओर टोल वसूलने वाली कार्यदायी संस्था ब्रजभूमि कंस्ट्रक्शन कंपनी भी जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त कराने में नाकाम साबित हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रतिदिन लाखों रुपये टोल के रूप में वसूले जाते हैं, लेकिन सड़क पर मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

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स्थायी समाधान चाहते हैं ग्रामीण, दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि अधूरे नाले का निर्माण शीघ्र पूरा नहीं कराया गया तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि ढाई करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी यदि हर बारिश में राष्ट्रीय राजमार्ग तालाब बन रहा है तो यह सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी हैं और अधूरा नाला राजनीतिक खींचतान में फंसकर क्षेत्रवासियों की परेशानी का कारण बना हुआ है। अब क्षेत्रवासी आश्वासन नहीं, बल्कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं।

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