लेह के दिराश ग्लेशियर में शहीद हुए एटा के नीरेश बाबू का शव रविवार सुबह गांव पहुंचा तो पूरा कासोंन बिलख पड़ा। इस दौरान सांसद, विधायक के साथ ही डीएम, एसएसपी ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
गांव कासोंन निवासी शहीद नीरेश बाबू के ताबूत में आए शव को देखकर रविवार को परिजनों के साथ ही गांव के लोग जमा थे। तिरंगे में लिपटे शव को देख परिवार के लोग फूट-फूटकर रोने लगे।
साथ ही पिता फौजदार सिंह को बेटे की शहादत पर गर्व भी था। शव पहुंचने की जानकारी पाकर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी भी गांव पहुंचे थे।
नीरेश बाबू के बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
सांसद राजवीर सिंह राजू ने शहीद की पत्नी शशि को बीस लाख और पिता फौजदार को पांच लाख रुपये का सहायता राशि का चेक दिया। सुबह छह बजे शव गांव पहुंच गया था। जहां दोपहर एक बजे शहीद को बेटे बसंत ने मुखाग्नि दी।
देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले शहीद नीरेश बाबू का एक हजार मीटर लंबी जमीन पर स्मारक बनाया जाएगा। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर दर्ज हुई पीएम, सीएम और रक्षामंत्री से शिकायत के बाद शहीद का स्मारक बनाए जाने के लिए जमीन का आवंटन किया है।
गांव कासोन निवासी नीरेश बाबू की शहादत के बाद सक्रिय हुए परिजनों की मांग पर जिला प्रशासन ने उनके स्मारक के लिए एक हजार मीटर जमीन का आवंटन किया है।
यहां बनेगा स्मारक
अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़
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भाई अनिल और करनसिंह ने भाई का स्मारक बनाए जाने को लेकर जीटी रोड से कासोंन को जाने वाली सड़क तिराहे पर जमीन की मांग की थी। तहसीलदार ने उस जमीन को दूसरे मौजा की बताकर देने से मना कर दिया था।
इसके बाद परिवारीजनों ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, रक्षामंत्री के लिए ट्विटर पर शिकायत दर्ज कराई थी। डीएम अमित किशोर से ग्राम प्रधान सहित अन्य लोगों ने बातचीत की थी।
बाद में सोशल मीडिया पर दर्ज हुई शिकायत के बाद मांग वाली हरचंदपुर मौजा की जमीन में एक हजार मीटर जगह को प्रशासन ने स्मारक के लिए मुहैया कराई है।