आगरा में पहले भी अलग-अलग टीमें नकली घी, तेल, मोबिल ऑयल, आटो पार्ट्स, कपड़े, जूते, खाद, सर्जिकल सामान तक पकड़ चुकी हैं। कार्रवाई के बाद कुछ दिन तक अवैध कारोबार पर ब्रेक लगता है। सख्ती न होने की वजह से फिर से धड़ल्ले से शुरू हो जाता है।
आगरा में एक बार फिर नकली दवाओं के बड़े सिंडीकेट का खुलासा होने के बाद कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जहां नकली दवा बेचकर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है वहीं दवा कंपनियों को करोड़ों का चूना हर वर्ष लगाया जा रहा है। इस बार भी टीम का गठन लखनऊ स्तर से किया गया। एसटीएफ को लगाया गया। औषधि विभाग के अलग-अलग जिलों के कर्मचारियों को लगाया गया। एक साथ छापा डाला गया। दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया।
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स्थानीय अधिकारियों को नहीं दी गई सूचना
इस बार स्थानीय अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं दी गई, क्योंकि सूचना लीक होने से माल नहीं पकड़ा जाता था। इस पूरे ऑपरेशन को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया। यही वजह रही कि 3.50 करोड़ से अधिक की दवाएं और 1 करोड़ रुपये हवाला के पकड़े गए।
नकली को असली बनाने के लिए क्यूआर कोड
नकली दवाओं की कालाबाजारी के पकड़े जाने से बचने के लिए माफिया जिस क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते थे, उसी से पूरा खेल पकड़ा गया। दवा माफिया की सभी दवाओं पर एक ही क्यूआर कोड दर्ज था, जबकि कंपनियां अपनी हर दवा पर अलग-अलग क्यूआर कोड दर्ज करती हैं। दवाओं के मिलान पर एक समान कोड मिलते ही एसटीएफ ने आरोपियों को धर दबोचा।
15-20 दिन से रेकी
सहायक आयुक्त औषधि नरेश मोहन दीपक ने बताया कि जायडस, सनफार्मा, ग्लैनमार्क और सनोपी कंपनी के आधिकारियों ने उनकी कंपनी के नाम से हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल एजेंसी के यहां से नकली दवाओं की कालाबाजारी की शिकायत की। इस पर एसटीएफ, औषधि विभाग और कंपनी के अधिकारियों के साथ दवा माफिया के गोदाम और दुकानों की बीते 15-20 दिन से रेकी की। इनकी दुकानों से ग्राहक बनकर विभिन्न कंपनी की दवाएं भी खरीदीं। दवाओं के रैपर, बैच नंबर समेत अन्य जानकारी हूबहू थी।
क्यूआर कोड से खेल
पैकेट पर दर्ज क्यूआर कोड को जब स्कैन किया तो ये भी कंपनी का ही था। इससे कंपनी के अधिकारी भी चकित रह गए लेकिन जब कई दवाओं के क्यूआर कोड को स्कैन किया तो इनका फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। सभी दवाओं का क्यूआर कोड एक ही था, जबकि नामी कंपनियों की हर दवा पर क्यूआर कोड अलग-अलग होता है। इससे कंपनी अधिकारियों ने तत्काल इन दवाओं के नकली होने की पुष्टि कर दी।
टोल फ्री नंबर
इसके बाद दवा माफिया के गोदाम और मेडिकल स्टोरों को सीज कर दिया गया। जांच करने पर कई नामी कंपनियों की दवाएं बरामद हुईं। नकली दवा की शिकायत टोल फ्री नंबर 18001805533 पर कर सकते हैं।