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UP: अब अंग्रेजी में ब्रज की मिठास और अवधी की बोली, मातृभाषा दिवस पर केंद्रीय हिंदी संस्थान की अनूठी पहल

Sat, 21 Feb 2026 11:33 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

केंद्रीय हिंदी संस्थान ने ब्रज, अवधी, बुंदेली, राजस्थानी और भोजपुरी के लोक साहित्य व लोकोक्तियों का अंग्रेजी अनुवाद शुरू किया है। अवधी और बुंदेली का काम पूरा हो चुका है, बाकी भाषाओं का कार्य अंतिम चरण में है, ताकि इन बोलियों को वैश्विक पहचान मिल सके।
 
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केंद्रीय हिंदी संस्थान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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 केंद्रीय हिंदी संस्थान में पहली बार ब्रज भाषा सहित पांच भारतीय भाषाओं के लोक साहित्य और प्रचलित लोकोक्तियों का अंग्रेजी में अनुवाद किया जा रहा है। संस्थान के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं प्रभारी प्रो. उमापति दीक्षित ने बताया कि इस परियोजना के तहत ब्रज, अवधी, बुंदेली, राजस्थानी और भोजपुरी भाषाओं के लोक साहित्य और प्रचलित लोकोक्तियों को संकलित कर उनका अंग्रेजी में अनुवाद किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इन समृद्ध लोक परंपराओं को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाना है।
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फिलहाल अवधी और बुंदेली के अंग्रेजी रूपांतरण का काम पूरा हो चुका है। इनका संशोधन और परिवर्धन कार्य जारी है। इसके अलावा ब्रज, राजस्थानी और भोजपुरी का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। प्रो. उमापति ने बताया कि प्रत्येक भाषा की अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और लोक जीवन की झलक उसके लोकगीतों और लोकोक्तियों में ही मिलती है।

अनुवाद के माध्यम से इन भाषाओं की मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय हिंदी संस्थान मातृभाषाओं और बोलियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि भाषा केवल एक संवाद नहीं है ये हमारी संस्कृति और स्मृति की पहचान की धरोहर है। ये हर राज्य के लिए है।
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मातृभाषा दिवस आज
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हर वर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत भाषाई विविधता और मातृभाषा के संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 1952 में बांग्लादेश में अपनी मातृभाषा को मान्यता दिलाने के लिए छात्रों ने आंदोलन किया था, जिसमें कई छात्रों ने बलिदान दिया। उनकी स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है।
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