धुलियागंज स्थित देशी शराब के ठेके पर
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जिस देश की स्वतंत्रता के लिए चिम्मनलाल जैन ने अपने जान की बाजी लगाई, आज वे उसी देश में जान देने का मजबूर हैं। उनकी मांग उत्तर प्रदेश में शराब बंदी की है लेकिन ये मांग पूरी न होने पर जिलाधिकारी आवास के बाहर जान देने पहुंच स्वतंत्रता सेनानी चिम्मनलाल जैन को पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्य मांग से ही भटका दिया।
शराब की अवैध दुकानों के निरीक्षण के नाम पर वह स्वतंत्रता सेनानी को इधर से उधर घुमाते रहे। कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें घर लौटा दिया। वह भी इस शर्त के साथ कि शराब की अवैध दुकानें तभी बंद कराई जाएंगी जबकि वह पंजीकृत मंदिर व स्कूल के दायरे में आएंगी।
बता दें कि चिम्मनलाल जैन ने सोमवार सुबह 10 बजे डीएम आवास के बाहर ही गला घोंटकर जान देने का एलान किया था। वे अपने समर्थकों के साथ धरना शुरू कर पाते, इससे पहले ही सीओ एलआईयू विजय कपिल, एसीएम चतुर्थ वंदिता श्रीवास्तव, जिला आबकारी अधिकारी एलबी यादव पहुंच गए।
इसके बाद सभी धुलियागंज स्थित देशी शराब के ठेके पर पहुंचे। यह ठेका मंदिर-स्कूल से चंद कदमों की दूरी पर है। इसके बाद वे रेलवे अस्पताल पहुंचे। यहां पास में ही शराब का ठेका है। निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने 24 घंटे में जांच कराने के बाद इन ठेकों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर स्वतंत्रता सेनानी ने जान देने का फैसला टाल दिया। इस दौरान वीरेंद्र जौनवार, गिर्राज सिंह धाकरे, अतुल दुबे, राकेश जयंत, दिलीप पाठक आदि मौजूद थे।