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UP: 'फोन मत काटना' रिटायर्ड शिक्षिका पांच दिन तक घर में रहीं कैद, कमरे से भी बाहर न निकलीं; 84 लाख की हुई ठगी

Mon, 04 May 2026 08:20 AM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आगरा में साइबर ठगों ने पुलिस और ईडी अधिकारी बनकर 75 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। पांच दिन तक मानसिक दबाव बनाकर उनसे 84 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए।
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डिजिटल अरेस्ट एआई।
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विस्तार
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तुमने आतंकी संगठन के लिए करोड़ों की फंडिंग करने का काम किया है। तुम्हारे खाते में रकम आई है। हम लोगों के पास सारे सबूत हैं, तुम्हें गिरफ्तार किया जाएगा। जिंदगी भर जेल में सड़ना पड़ेगा...। कभी पुलिस तो कभी प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी बनकर रिटायर्ड शिक्षिका को कॉल किया गया। उन्हें पांच दिन डिजिटल अरेस्ट कर साइबर अपराधियों ने खाते में 84 लाख रुपये जमा करा लिए। शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी न्यू आगरा क्षेत्र की एक शिक्षिका को डिजिटल अरेस्ट कर धोखाधड़ी की गई थी।
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पीड़िता रूपा बल दयालबाग की रहने वाली हैं। उनकी उम्र 75 साल है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह एक कंपनी की ओर से संचालित विद्यालय में शिक्षिका थीं। 14 अप्रैल को व्हाट्सएप पर अनजान नंबरों से वाॅयस और वीडियो कॉल आए थे। कॉल करने वाले कभी खुद को मुंबई पुलिस वाला बताया तो कभी सीबीआई का अधिकारी। नौकरी और घर के बारे में जानकारी ली। कहा कि आपने आधार कार्ड दिया है। इस आधार कार्ड से खाता खुला है। इसमें रकम जमा कराई गई है।

धमकाया कि आतंकवादी फंडिंग के मामले में शामिल पाई गई हैं। खातों में अवैध तरीके से धन आया है। मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ है। अगर कार्रवाई से बचाना है तो जैसा पूछा जा रहा है वैसा बताती चलें, अगर बचने की कोशिश की तो पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज देगी। रूपा बल का बेटा घर से बाहर रहता है। पति की मृत्यु हो चुकी है। कॉल आने के बाद वह काफी डर गई थीं।
 

आरोपियों ने उनसे कहा कि घर से बाहर मत निकलना। पुलिस की पूछताछ के बारे में किसी से बात मत करना। अगर किसी को बताया तो फिर बचना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। आरोपियों ने 15 अप्रैल से 18 अप्रैल तक उन्हें कई बार वीडियो और वॉयस कॉल किए। कई बार में 84 लाख रुपये अलग-अलग खातों में जमा करा लिए। वीडियो काल पर ठग वर्दी में बात करते थे।

क्या है मनी लॉन्ड्रिंग
पुलिस के मुताबिक, यह वो अवैध प्रक्रिया है, जिसमें आपराधिक गतिविधियों के लिए धन इकट्ठा किया जाता है। मुख्य रूप से आतंकवाद, ड्रग्स की तस्करी, भ्रष्टाचार आदि के मामले आते हैं। काले धन को वैध वित्तीय प्रणाली के माध्यम से घुमाया जाता है ताकि वह सही कमाई जैसा दिखने लगे। इसमें देश की बड़ी जांच एजेंसियां कार्रवाई करती हैं। खातों में हुए अवैध धन के लेनदेन के बारे में पता किया जाता है।

 

सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर संकट
साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं को अंजाम देने के लिए 60 साल से अधिक उम्र के लोगों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शिकार बना रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यह लोग विभागीय कर्मचारियों की मदद से लोगों का डाटा निकाल रहे हैं। जिन लोगों के खातों में अधिक रकम होती है, उनको कॉल करते हैं। डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर रकम जमा करा लेते हैं। कई बार लोग फोन काट देते हैं तो कुछ लोग जाल में फंस जाते हैं। शिक्षिका से भी रकम लेने के लिए उन्हें बताया गया था कि जो रकम ली जा रही है वह जांच के बाद वापस कर दी जाएगी। इस वजह से शिक्षिका ने रकम जमा कर दी।
 
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कॉल काट दें, 1930 पर करें शिकायत
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती है। अगर कोई फोन पर गिरफ्तारी का डर दिखाए तो समझ जाना चाहिए कि वह ठग है। तुरंत कॉल काट देनी चाहिए। धोखाधड़ी होे तो तत्काल 1930 नंबर पर कॉल करें। नजदीकी थाने पर जाएं या साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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