आगरा। जुगसेना में 7950 वर्ग मीटर भूमि फर्जी वसीयत से बेच दी गई। उप निबंधक किरावली ने संदिग्ध वसीयत का पंजीकरण भी कर लिया। संपत्ति मालिक की मौत के 16 दिन बाद स्टांप खरीदा गया। जबकि वसीयत तीन महीने पहले ही हो चुकी थी। मामला प्रमुख सचिव स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन और पुलिस आयुक्त तक पहुंचने के जांच शुरू हो गई है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस वसीयत को फर्जी बताया जा रहा है उसका रिकार्ड तक रजिस्ट्री दफ्तर से गायब है। सादाबाद निवासी मछला देवी ने प्रमुख सचिव को भेजी शिकायत में कहा है कि उसके पिता हुकुम सिंह के नाम मौजा जुगसेना में खाता संख्या 39 में गाटा संख्या 75 अ, 75 ब और 104 एवं 580/2 कुल 29300 वर्ग मीटर भूमि थी। पिता हुकुम सिंह की मृत्यु 6 अगस्त 2006 को हो गई। आरोप है कि कूट रचित दस्तावेज से पिता की मृत्यु के बाद विपक्षियों ने फर्जी वसीयत बनाई। जिसका स्टांप 22 अगस्त को खरीदा गया। जबकि वसीयत 20 मई 2006 को दर्शाई गई। यह फर्जीवाड़ा भूमि को हड़पने वालों ने उप निबंधक किरावली के साथ मिलकर किया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव, पुलिस आयुक्त के अलावा जिला निबंधक से भी शिकायत की गई है। एक तरफ पुलिस जांच में जुटी है। वहीं, जिला निबंधक शुभांगी शुक्ला का कहना है कि प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
उप निबंधक तृतीय की बढ़ सकती है मुश्किलें
- शासनादेश और पंजीयन एक्ट के विरुद्ध मरणोपरांत वसीयत पंजीकरण मामले में उप निबंधक तृतीय राकेश यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आरोप है कि उप निबंधक तृतीय राकेश यादव ने नियमों को ताक पर रख चार वसीयतों का मरणोपरांत पंजीयन किया। इसमें 27 फरवरी 2025 को सत्यनारायण शर्मा और भरत लाल शर्मा के पक्ष में विलेख संख्या 117/2025, सुनील शर्मा के पक्ष में 21 मार्च 2024 को विलेख संख्या 148/2024, दिनेश कुमार के पक्ष में 15 जून 2024 को विलेख संख्या 326/2024 और विलेख संख्या 327/2024 पर दर्ज मरणोपरांत वसीयत की महानिरीक्षक स्टांप नेहा शर्मा के निर्देश पर जांच शुरू हो गई है।