वर्ष 2012-13 में सिकंदरा डिस्ट्रीब्यूरी नहर के पास हुआ था पौधरोपण
वर्तमान में झाड़ियों के अलावा एक पेड़ नहीं, पूरा क्षेत्र कूड़े से पटा पड़ा
शहर का पर्यावरण भला क्यों न बिगड़े? जमीन के बजाय कागज में पौधरोपण जो किया जा रहा है। तीन साल पहले सिकंदरा डिस्ट्रीब्यूटरी नहर किनारे एक-दो नहीं, बल्कि लगभग साढ़े चार हजार पौधे रोपने का दावा किया गया। वर्तमान में यहां सिर्फ कुछ झाड़ियां ही हैं। क्षेत्र हराभरा नहीं बल्कि कूड़े से पटा है। पौधे रोपने के अभियान का यह ‘सच’ आने वाली 18 जुलाई को साढ़े छह लाख से अधिक पौधे रोपे जाने के दावे पर सवाल खड़ा कर रहा है।
वन विभाग ने वर्ष 2012-13 में सिकंदरा डिस्ट्रीब्यूटरी नहर (शास्त्रीपुरम फ्लाईओवर के पास) के पास सात हेक्टेयर जमीन पर शीशम, बरगद, नीम, जामुन, अर्जुन, पापड़ी, इमली, पाकड़, गुलर आदि के 4,375 पौधे रोपने का दावा किया। मगर, यहां शीशम, बरगद तो दूर पाकड़ के पेड़ तक नजर नहीं आ रहे। इनकी न तो जड़ें दिख रहीं और न ही तना, जिससे कि अंदाजा लगाया जा सके कि यहां कभी पौधे रोपे गए थे। जिस जमीन पर पौधे रोपे जाने थे, वहां इंडस्ट्रियल वेस्ट फेंका जा रहा है। यहां कूड़े के ढेर लग चुके हैं।
पौधशाला में ही दम तोड़ गए सैकड़ों पौधे
एक तरफ सालों पहले लगे पेड़ों का पता नहीं चल रहा तो दूसरी तरफ सैकड़ों पौधे रखरखाव के अभाव में वन विभाग की ही पौधशाला में दम तोड़ रहे हैं। लखनपुर पौधशाला में पूरा स्टाफ होने बावजूद पौधों की देखभाल नहीं होती। सैकड़ों पौधे दम तोड़ चुके हैं। 18 जुलाई को इस समेत कई पौधशालाओं से पौधरोपण के लिए पौधे लिए जाएंगे।
पालिथीन में रखी जा रहीं पौध
प्रदेश सरकार पिछले साल ही पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा चुकी है। मगर, वन विभाग पर इसका कोई असर नहीं। पौधों को पॉलिथीन में ही रखा जा रहा है। विभाग सरकार के आदेश का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है। निजी पौधशालाओं में भी पॉलिथीन में पौधे रखे जा रहे हैं।