उपलब्ध साक्ष्य एवं वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता रमा शंकर सिंह राजपूत एवं डीजीसी बसन्त गुप्ता के तर्क पर जिला जज ने आरोपियों को दोषी पाया। चारों दोषियों को आजीवन कारावास एवं अर्थ दंड से दंडित किया।
आगरा के थाना बसई अरेला के 9 साल पुराने हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के मामले में आरोपी गब्बर, राजेंद्र, शैतान सिंह और डीपी को साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोषी पाया। चारों को आजीवन कारावास और 80 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है।
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ये है मामला
बसई अरेला के सड़क का पुरा निवासी डालचंद ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा कि 24 अक्तूबर, 2013 की शाम 7:30 बजे घर पर अरनोटा निवासी गब्बर, राजेंद्र, डीपी और शैतान सिंह आए। वह उसके भाई मास्टर को अपने साथ ले गए। उससे ट्रैक्टर से ईंट भरने की बात कही थी। मजदूरी देने का आश्वासन दिया था। दूसरे दिन सुबह तक भाई घर नहीं आया। इस पर डालचंद गब्बर सहित अन्य के घर गए। मगर, वो नहीं मिले। बाद में भाई मास्टर की लाश अरनोटा रेलवे लाइन के पास स्थित पुलिया की झाड़ियों में मिली। उन्होंने चारों आरोपियों के खिलाफ भाई की हत्या का शक जताया था।
अभियोजन पक्ष की तरफ से मामले की पुष्टि के लिए डालचंद, कोकिला देवी, वेद प्रकाश, सुरेश, सिपाही प्रवीन कुमार, डॉ. संजय कुमार गुप्ता, उप निरीक्षक नंद किशोर, निरीक्षक विनय प्रकाश सिंह को गवाही के लिए कोर्ट में पेश किया। उपलब्ध साक्ष्य एवं वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता रमा शंकर सिंह राजपूत एवं डीजीसी बसन्त गुप्ता के तर्क पर जिला जज ने आरोपियों को दोषी पाया। चारों दोषियों को आजीवन कारावास एवं अर्थ दंड से दंडित किया।