65 बीघा जमीन का था लालच
मृतक सुखस्वरूप के पिता नंद सिह के भाई कुंवर पाल के छह पुत्र थे, जिनके हिस्से में 65 बीघा जमीन थी। सुखस्वरूप अपने पिता का इकलौता पुत्र था, इसलिए उसके अकेले ही हिस्से में 65 बीघा जमीन आई। इस वजह से मृतक सुखस्वरूप की संपन्नता से उसके चचेरे भाई ईर्ष्या करते थे। सुखस्वरूप का परिवार समाप्त होने के बाद उसके चचेरे भाई ही संपत्ति के कानूनी वारिस होते। पुलिस ने तब घटनास्थल से 8 खाली खोखे और एक कारतूस बरामद किया था। पुलिस के मुताबिक घर में रखा सोना चांदी और नगदी नहीं ले जाई गई। इससे स्पष्ट था कि हत्यारे केवल सभी को मारने के लिए ही आए थे।
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42 साल पहले की लाइव रिपोर्ट : बारिश से स्याह रात और हो गई भयानकI
Iसांझ के झुटपुटे में धरैरा गए हमारे संवाददाता को बातचीत के दौरान अनेक ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 2000 की आबादी वाले गांव में ब्राह्मण, ठाकुर और बघेल बराबर हैं। सुखस्वरूप का पक्का मकान है। सुख स्वरूप जाति का ठाकुर लेकिन आचरण में विनम्र, शांतिप्रिय यहां तक कि पड़ोसियों से भी उसकी यदाकदा ही वार्ता होती थी। अपने काम से काम 65 बीघा खेत का अकेला मालिक, ट्रैक्टर और पक्का मकान, अच्छी खेती-बाड़ी। दो अगस्त की काली रात को बरसात के मौसम ने उसे और ज्यादा भयानक बना दिया था। बादल भले ही न बरसे लेकिन आकाश की काली स्याही, भयावह वातारण और सन्नाटे के लिये पर्याप्त थी। सुखस्वरूप का दोष मात्र यही या कि उसने स्वयं ही अपने हाथ-पैर मजबूत बनाकर अपनी धरती को कंचन उगलने हेतु मजबूर कर दिया था। उसके परिवारीजनों को उसका संपन्न होना अच्छा नहीं लगता था। I