पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव छोटू
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यूपी के फिरोजाबाद के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव छोटू ने सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ साजिश की गई है और किसने डील की है इसका पर्दाफाश वह जेल से बाहर आने के बाद करेंगे।
साजिश में उन्होंने सपा नेताओं का हाथ बताया है। वह जेल जाने से पहले मीडिया से मुखातिब हुए। कहा रिकार्डिंग सहित कई पुख्ता सबूत मेरे पास हैं। जेल से बाहर आने पर इन सबूतों को सार्वजनिक करुंगा। रामगोपाल यादव को इन्हीं सपा नेताओं ने भ्रमित किया।
छोटू ने कहा कि जिला पंचायत चुनाव के लिए प्रोफेसर रामगोपाल यादव के कहने पर ही उन्होंने चार महीने पहले से तैयारी शुरू की। मेरे पास पर्याप्त सदस्य थे। विरोधियों के पास मुझे अध्यक्ष बनने से रोकना कोई विकल्प नहीं था इसलिए एक बड़ी साजिश करके मेरी सदस्यता समाप्त कराई गई। इनमें सपा के ही नेता शामिल थे।
भाजपा के पराजित प्रत्याशी और पूर्व मंत्री के साथ करहल के एक सपा नेता मिल गए। सपा व जिला पंचायत सदस्य अपनी मां को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाना चाहते थे इसलिए इन्होंने पूरी साजिश रची। करहल के सपा नेता के माध्यम से मेरी सदस्यता समाप्त कराने के लिए दो करोड़ रुपये की डील लखनऊ के एक भाजपा नेता के साथ की।
मेरी सदस्यता खत्म होने के बाद सांसद अक्षय यादव ने मेरे पिता हरिओम यादव से जेल में मुलाकात की। विधायक हरिओम यादव ने सुझाव दिया था कि नौ सदस्य अविश्वास प्रस्ताव के समय जो सपा के साथ थे उनमें से या निर्मला यादव को प्रत्याशी बना दिया जाए।
इस पर सहमति बन चुकी थी लेकिन करहल के नेता के साथ अपनी मां को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे सपा नेता ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव के समक्ष अपनी भूमिका बनाई। जब उक्त सपा नेता की मां का नाम प्रत्याशी के रूप में सामने आया तो मैंने चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं ली और सदस्यों को भी अपनी मर्जी से निर्णय लेने के लिए छोड़ दिया।
मिला था ये आफर
छोटू यादव ने कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए हमेशा वफादारी के साथ काम किया है। यह बात सही है कि प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने मेरा हर जगह साथ दिया और वह मेरे पिता समान है। मैं और मेरे पिता पार्टी के प्रति वफादार हैं। उत्पीड़न के बाद भी हम भाजपा सरकार के आगे झुके नहीं।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सभी कार्रवाई खत्म करने का लालच देकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराने के लिए काफी प्रयास किया लेकिन हम झुके नहीं। संघर्ष कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
अफसोस है कि प्रोफेसर रामगोपाल यादव जैसे गंभीर नेता को हमारी पार्टी के ही कुछ नेताओं ने गुमराह किया और उन्होंने हमारा पक्ष जाने बिना मेरे और पिता हरिओम यादव के ऊपर गंभीर आरोप लगा दिए।