डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के एक और पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित भ्रष्टाचार की जांच में फंस गए हैं। विजिलेंस इनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्य, खरीद समेत अन्य की जांच के लिए विश्वविद्यालय से साक्ष्य जुटाए हैं। टीम ने विश्वविद्यालय से करीब 300 पेज की रिपोर्ट जब्त की है।
- करीब 80 करोड़ रुपये के भवन बिना जरूरत के बनवाए। इनका नक्शा तक पास नहीं करवाया।
- परिणाम बनाने वाली कंपनी के परीक्षा संबंधी अधूरे कार्य पर भुगतान कराए।
- संविदा पर अपने चहेते लोगों को नियुक्त किया, मनमानी वेतन भी दिया, बाउंसर भी रखे।
- संस्कृति भवन और शिवाजी मंडपम के निर्माण और फर्नीचर में घोटाला और फर्जीवाड़ा।
- चार करोड़ रुपये से बने पीएचडी रिसोर्स सेंटर और हेल्थ रिक्रिएटिव सेंटर का निर्माण
कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि 'पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की विजिलेंस जांच हो रही है। शुक्रवार को 20 बिंदुओं पर रिपोर्ट सौंप दी है। जांच के लिए विजिलेंस को और रिकॉर्ड मांगने पर उपलब्ध कराएंगे।'
कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि 'विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित पर विजिलेंस की जांच उनके कार्यकाल से पहले की है। इस संदर्भ में जो भी रिपोर्ट और साक्ष्य विजिलेंस मांग रही है, उसे कुलसचिव के जरिये उनको दिया जा रहा है।'
पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित ने बताया कि 'मैंने अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालय का कोष डेढ़ गुना बढ़ाया। संबद्धता, परीक्षा शुल्क समेत अन्य मामलों में पारदर्शिता भी अपनाई। द्वेष भावना से शिकायत की है, विजिलेंस जांच कर रही है। विजिलेंस के समक्ष अपना पक्ष भी रखूंगा।'